Tuesday, July 7, 2026

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हर जिले में निगरानी थाना-ओपी खोलने की तैयारी:प्रमंडलों में क्षेत्रीय कार्यालय की भी योजना, राजस्व एवं भूमि विभाग के अधिकारियों पर सबसे ज्यादा कार्रवाई


बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो अपनी पहुंच और कार्रवाई को और मजबूत करने की तैयारी में है। हर जिले में एक निगरानी थाना या ओपी खोलने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द विभाग को भेजा जाएगा।
इसके अलावा सभी प्रमंडलों में क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की भी योजना बनाई गई है। वर्तमान में पटना, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में निगरानी मामलों के लिए विशेष कोर्ट कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते मामलों को देखते हुए इनकी संख्या बढ़ाने की भी आवश्यकता है। वहीं, अगर अधिकारियों पर कार्रवाई की बात करें तो सबसे ज्यादा राजस्व एवं भूमि विभाग के ऑफिसर्स पर हुई है। ये जानकारी ब्यूरो के महानिदेशक (डीजी) जितेंद्र सिंह गंगवार ने सोमवार को पटना में एक पीसी में कही है। हर डेढ़ दिन में भ्रष्टाचार का नया मामला दर्ज हो रहा बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ भी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई में तेजी आई है। 2025 में अब तक 30 आरोपियों को सजा दिलाई जा चुकी है, जो पिछले 25 वर्षों के औसत से 5 से 6 गुना अधिक है। ब्यूरो अब हर डेढ़ दिन में भ्रष्टाचार का एक नया मामला दर्ज कर रहा है। ब्यूरो के महानिदेशक (डीजी) जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि 2000 से 2024 के दौरान औसतन हर साल 5.6 आरोपियों को सजा दिलाई जाती थी। इस साल अब तक 10 और आरोपियों को सजा मिल चुकी है, यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। डीजी गंगवार ने बताया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज होने की संख्या में भी वृद्धि हुई है। 2000 से 2024 के बीच सालाना औसतन 72 एफआईआर दर्ज होती थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 122 हो गई, जो लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
ट्रैप केस की संख्या भी बढ़ी मौजूदा वर्ष में एफआईआर दर्ज होने की रफ्तार पिछले वर्ष से भी अधिक है। पहले जहां औसतन दो दिन में एक एफआईआर दर्ज होती थी, वहीं अब यह औसत घटकर 1.4 दिन हो गया है, यानी लगभग हर डेढ़ दिन में एक नया मामला दर्ज हो रहा है। इसके अतिरिक्त, ट्रैप कार्रवाई में भी दोगुनी से अधिक तेजी आई है। पिछले 25 वर्षों में सालाना औसतन 49 ट्रैप केस होते थे, जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या 101 तक पहुंच गई है। डीजी ने उम्मीद जताई कि वर्तमान वर्ष में यह आंकड़ा तीन गुना तक पहुंच सकता है। भ्रष्ट अफसरों की 102 करोड़ की संपत्ति जब्ती की कार्रवाई

डीजी ने बताया कि भ्रष्टाचार के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित करने वाले लोक सेवकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई जारी है। अब तक 102 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें से 32 करोड़ रुपए की संपत्ति की जब्ती की प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है।

शिक्षक नियुक्ति घोटाले में 3.50 लाख शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच

डीजी गंगवार ने बताया कि 2006 से 2015 के बीच हुई शिक्षक नियुक्तियों की जांच लगातार जारी है। अब तक 3.50 लाख शिक्षकों के 6.70 लाख शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जा चुका है।
इस जांच के आधार पर अब तक 1830 एफआईआर दर्ज की गई हैं। कई मामलों की जांच अभी भी जारी है। प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए नेपाल सहित विभिन्न राज्यों के 378 बोर्ड और विश्वविद्यालयों से डिग्रियों का सत्यापन कराया गया है।
स्पीडी ट्रायल से भ्रष्टाचार पर लगेगी स्थाई रोक

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों का वर्गीकरण कर प्राथमिकता के आधार पर स्पीडी ट्रायल कराया जाना चाहिए। इससे दोषियों को जल्द सजा मिलेगी और सरकारी व्यवस्था में स्थायी सुधार आएगा।
शुरुआती दौर में भ्रष्टाचार के मामलों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन लगातार और प्रभावी कार्रवाई से भविष्य में ऐसे मामलों में कमी आएगी। हाल के दिनों में निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई का सकारात्मक प्रभाव विभिन्न सरकारी विभागों में देखने को मिला है।

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