जिला परिषद भवन डाकबंगला में शुक्रवार को 12वां राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हस्तकरघा उद्योग से जुड़े बुनकरों को प्रोत्साहित करना था। इस मौके पर हस्तकरघा उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। साथ ही कारीगरों को हर संभव सहयोग देने का संकल्प भी लिया। पारंपरिक बुनाई कला के संरक्षण और संवर्धन के प्रति लोगों को जागरूक करना भी उद्देश्य था। मुख्य अतिथि अंबोवाटोली की मुखिया रौशनी, विशिष्ट अतिथि हामी पंचायत के मुखिया प्रदीप बड़ाईक उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने हस्तकरघा से जुड़े कारीगरों के योगदान की सराहना की। अतिथियों ने कहा कि हस्तकरघा केवल रोजगार का माध्यम नहीं है। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्थानीय बुनकरों के कौशल को बढ़ावा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक बुनकरों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। इससे इस पारंपरिक कला को नई पहचान मिल सकेगी। कार्यक्रम का संचालन झारक्राफ्ट क्लस्टर मैनेजर मोहम्मद सैफ ने किया। उन्होंने हस्तकरघा दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने झारक्राफ्ट द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार कर स्थानीय बुनकर बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुनकर, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।


