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समरस्तीपुर शहर में शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार शाम पूजा पंडालों में दीप जलाए गए। इसके लिए महिला श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सूर्यास्त के साथ ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। महिलाओं और कुमारी कन्याओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर मां दुर्गा की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। संध्या आरती से पहले दीप जलाने की परंपरा ने पूजा पंडालों में भक्तिमय माहौल बना दिया। शहर के 12 पत्थर स्थित शिवकली दुर्गा पूजा पंडाल में शाम करीब 6 बजे के बाद दीप जलाने के लिए महिलाओं की भीड़ बढ़ने लगी। हाथों में दीप लिए श्रद्धालु मां दुर्गा के दरबार में पहुंचे और पूजा-अर्चना की। यह सिलसिला संध्या आरती से पहले तक जारी रहा। कुमारी कन्याओं ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर दीप जलाए। शहर के अन्य पूजा पंडालों में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है दीपदान पंडित पवन कुमार मिश्रा के अनुसार, सनातन धर्म में दीप प्रज्ज्वलन को अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के दौरान दीप जलाना श्रद्धा, आस्था और शुभता का प्रतीक है। मान्यता है कि दीप की रोशनी से वातावरण पवित्र होता है और भक्तों को आध्यात्मिक शांति मिलती है। नीम के पेड़ के नीचे भी दीप जलाने की परंपरा बताया कि श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार एक, 5 या उससे अधिक दीप जला सकते हैं। कुछ स्थानों पर नीम के पेड़ के नीचे भी दीप जलाने की परंपरा है, जिसे शुभ माना जाता है। हालांकि, दीप प्रज्ज्वलित करते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। नवरात्र के पहले दिन से ही पूजा पंडालों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और दीपों की रोशनी ने शक्ति की उपासना के पर्व की आध्यात्मिक छटा को और बढ़ा दिया।
हाथों में दीप लेकर मां के दरबार पहुंचीं महिलाएं:संध्या आरती से पहले लगी रही श्रद्धालुओं की भीड़, सुख-शांति की हुई प्रार्थना
