
CPI Maoist Commander Ram Prasad Mandi Surrender: नक्सलवाद के रास्ते पर 20 साल तक चलने के बाद राम प्रसाद मांडी मुख्यधारा में लौट आया है. उसके साथ 2 महिला नक्सलियों ने भी सरेंडर किया है. राम प्रसाद मांडी बंगाल, झारखंड और ओडिशा का जोनल कमांडर (बंगाल, झारखंड और ओड़िशा की क्षेत्रीय कमेटी का सदस्य) था. उसके साथ जिन महिला नक्सलियों ने सरेंडर किया है, उनके नाम जबा महतो उर्फ बुलू उर्फ गोरी, नयनतारा साहू उर्फ मीता उर्फ झूमा हैं. रामप्रसाद मांडी को महादेव और सचिन के नाम से भी जाना जाता है. इन नक्सलियों ने जो हथियार पुलिस को सौंपे हैं, वे तीनों हथियार पहले पुलिस से ही लूटे गये थे.
सरेंडर करने वाली 2 महिला नक्सली बंगाल की
- जबा झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी की रहने वाली है.
- नयनतारा पूर्व मेदिनीपुर के सोना चूड़ा की रहने वाली है.
- राम प्रसाद मांडी झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का रहने वाला है.
‘इलाके में विकास का अभाव था, इसलिए बना नक्सली’
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में सरेंडर करने के बाद राम प्रसाद मांडी ने कहा कि वह करीब 20 वर्षों तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) संगठन से जुड़ा रहा. उसके अनुसार, जिस इलाके में कभी विकास का अभाव था, वहां अब सड़क, बिजली व स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है. विकास कार्यों से प्रभावित होकर उसने सशस्त्र आंदोलन का रास्ता छोड़कर सरकार के विकास कार्यों में शामिल होने का फैसला किया है.
नक्सलियों ने सामान्य जीवन जीने की जतायी इच्छा
राम प्रसाद ने कहा कि पहले इलाके के पिछड़ेपन को देखकर उसे लगा था कि इसे दूर करने का एकमात्र रास्ता नक्सलवाद और माओवादी संगठन ही है. लेकिन अब हालात बदल गये हैं. दोनों महिला माओवादी नेताओं ने भी समाज की मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जीने की इच्छा जतायी.
ये भी पढ़ें: बंगाल-झारखंड में सक्रिय 3 शीर्ष नक्सली कमांडरों ने बांकुड़ा में हथियार के साथ किया सरेंडर
बांकुड़ा पुलिस लाइन में नक्सलियों ने डाले हथियार
बंकुड़ा पुलिस के सामने हथियार डालने वाले ये तीनों नक्सली लंबे समय से भाकपा माओवादी संगठन में सक्रिय थे. बुधवार को तीनों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करते हुए मुख्यधारा में लौटने की घोषणा की. बांकुड़ा पुलिस लाइन के कॉन्फ्रेंस हॉल में पश्चिम बंगाल पुलिस के एडीजी (पश्चिमांचल) आनंद कुमार के समक्ष माओवादी नेता जवा उर्फ बुलू, नयनतारा साहू या मीता उर्फ झूमा और रामप्रसाद मांडी उर्फ सचिन ने हथियार डाल दिये.
एडीजी बोले- 10 साल से बंगाल में सक्रिय थे भाकपा माओवादी के सदस्य
एडीजी आनंद कुमार ने बताया कि तीनों करीब 20 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़े थे. बीते 10 वर्षों से पश्चिम बंगाल में ये लोग सक्रिय थे. जवा और नयनतारा माओवादी संगठन की जोनल कमेटी की सदस्य थीं, जबकि रामप्रसाद मांडी बंगाल, झारखंड और ओड़िशा की क्षेत्रीय कमेटी का सदस्य था.
ये भी पढ़ें: असीम कुमार मंडल उर्फ आकाश : पीपुल्स वार ग्रुप से भाकपा माओवादी तक, जानें कब, कैसे और कहां से हुई गिरफ्तारी
तीनों नक्सलियों पर दर्ज हैं 80 मुकदमे
पुलिस के अनुसार बांकुड़ा, पुरुलिया, झारग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर के अलावा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में भी ये लोग सक्रिय थे. आत्मसमर्पण के दौरान तीनों ने 2 इंसास राइफल, 1 एके-47, 10 मैगजीन और 154 राउंड कारतूस पुलिस को सौंपे. पुलिस के मुताबिक, तीनों के खिलाफ विभिन्न थानों में संयुक्त रूप से 80 से अधिक मामले दर्ज हैं. इनमें यूएपीए के अलावा हथियार और विस्फोटक कानून के तहत दर्ज मामले भी शामिल हैं. सरेंडर के मौके पर डीआइजी (बांकुड़ा रेंज) अभिषेक मोदी, पुलिस अधीक्षक(एसपी) वीजी सतीश पसुमर्थी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे.
The post 2 महिला समेत 3 नक्सली कमांडर मुख्यधारा में लौटे, पुलिस से लूटे गये इंसास और एके-47 राइफल के साथ बंगाल में किया सरेंडर appeared first on Prabhat Khabar.
