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2012 में आशा ताई के ‘दम मारो दम’ और ‘पिया तू’ गीतों से झूम उठी थी राजधानी


आशा ताई की गायकी में अल्हड़पन : मृणालिनी उनकी गायकी में जो अल्हड़पन, शरारत और चंचलता थी, वो शायद ही आज किसी गायिका में है। आशा भोसले का रांची में सबसे चर्चित कार्यक्रम 8 जनवरी 2012 को हुआ था। इस दौरान एक बहुत ही दिलचस्प वाक्या हुआ था। ​7 जनवरी को रांची में भारी बारिश और कोहरे के कारण उनका विमान लैंड नहीं कर सका था। उन्हें कोलकाता में ही रुकना पड़ा। मोरहाबादी के बिरसा मुंडा स्टेडियम में हजारों लोग उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन खराब मौसम की वजह से कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। अगले दिन 8 जनवरी को मौसम थोड़ा साफ होते ही वह रांची पहुंचीं। कड़ाके की ठंड और बूंदाबांदी के बावजूद करीब 40,000 दर्शकों की भीड़ उन्हें सुनने के लिए स्टेडियम में डटी रही। उन्होंने ‘दम मारो दम’ और ‘पिया तू अब तो आजा’ जैसे अपने सदाबहार गानों से पूरे शहर को झूमने पर मजबूर कर दिया था।
1985 में पहली बार रांची आई थीं आशा भोसले : मोनी
संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। अपनी खनकती आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली ‘सुरों की मल्लिका’ आशा भोसले ने रविवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर है। राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में भी कला प्रेमी दुखी हैं। आशा ताई दो बार रांची भी आई थीं। पहली बार वर्ष 1985 में और फिर जनवरी 2012 को उनका रांची आगमन हुआ था। 8 जनवरी 2012 रांची के मोरहाबादी मैदान में हुए आशा भोसले के लाइव परफॉर्मेंस ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। रांची के लोग उनके उस ऐतिहासिक लाइव परफॉर्मेंस को याद कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। हर गीत को अपना कैसे बना लेना है, आप ही से सीखा : ज्योति साहू हर गीत को अलग तरह से कैसे गाना है और उसे अपना कैसे बना लेना है, आप ही से सीखा। बचपन से आपको अपना आदर्श माना और आपको सुनकर ही आज अपने गायन में नयापन लाने की कोशिश कर रही हूं। यह आपकी ही देने है। आपका हर गीत और आपकी शानदार गायन शैली की दीवानी हूं और हमेशा रहूंगी। मुंबई जाकर भी आपसे नहीं मिल पाई, इसका अफसोस हमेशा रहेगा। आपका जाना स्तब्ध कर गया। आपकी अद्भुत गायन शैली और आपका हर गीत पूरे भारतवर्ष के दिलों में सदैव गूंजता रहेगा। अंतिम जोहार गुरु मां। कार्टूनिस्ट मोनी बताते हैं कि वर्ष 1985 में आशा भोसले पहली बार रांची आई थी। जिमखाना क्लब में गोपाल साहू द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आशा भोसले सिंगर सुदेश भोसले के साथ आई थी। इस दौरान उन्होंने मौके पर ही उनका केरिकेचर बनाया था। जिस पर आशा भोसले ने हस्ताक्षर भी किया था और केरिकेचर की खूब सराहना की था। आशा भोसले के निधन पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।
भारतीय कला जगत में एक युग का अंत : हरिवंश राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने रांची आई आशा भोसले के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। उन्होंने तस्वीर के साथ लिखा कि शीर्षस्थ कलाकार और महान गायिका आशा भोंसले जी का निधन, भारतीय कला जगत में एक युग का अंत है। भारतीय कला और संगीत को समृद्ध करने में उनके महान योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। हम सबके आग्रह पर विपरीत मौसम में वह एक बार रांची आईं और उनका कार्यक्रम यादगार बना। उनकी स्मृतियों को नमन। ॐ शांति। रांची के प्रसिद्ध कलाकार मोहम्मद साबिर हुसैन ने आशा भोसले को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी एक तस्वीर बनाई। उन्होंने कहा कि आशा भोसले एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व थीं, जिनकी स्मृतियां सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। 8 जनवरी 2012 को रांची के मोरहाबादी मैदान में आशा भोसले ने ऐतिहासिक लाइव परफॉर्मेंस दिया था।

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