धनबाद6 घंटे पहले
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निरसा-गाेविंदपुर जलापूर्ति याेजना
वर्ष 2028 तक हर घर नल से जल का लक्ष्य पाइपलाइनों में अटका
धनबाद जिले में वर्ष 2028 तक सभी घरों में नल से जल आपूर्ति का लक्ष्य है। वर्ष 2016-17 में जल जीवन मिशन के तहत कई योजनाएं शुरू की गईं। इन्हें दो से तीन वर्षों में पूरी कर विभाग को हैंडओवर करना था। लेकिन अभी तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी है।
योजनाओं का यह हाल निर्माण एजेंसियों की लेटलतीफी की वजह से तो हुआ ही है, विभाग को भी इनका ख्याल तब आया जब 2028 का डेडलाइन करीब आ गया है। शहर में चल रही योजनाओं का भी यही हाल है। दैनिक भास्कर ने जिले की जलापूर्ति योजनाओं की पड़ताल की, तो निर्माण की धीमी रफ्तार, अधूरे काम की स्थिति सामने आई है।
वर्ष 2016-20 के बीच शुरू हुईं लगभग 10 प्रमुख योजनाओं का काम अब तक अधूरा है। इन पर अब तक 2100 करोड़ रुपए से अधिक खर्च के बाद भी लोगों को इनका लाभ नहीं मिला है। पेयजल विभाग के एसई का कहना है कि श्रीराम ईपीसी की योजनाएं सर्वाधिक विलंब से चल रही हैं। इसे डिबार किया जाएगा।
वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है अन्य एजेंसियों की योजनाएं भी रुकीं निरसा-गोविंदपुर मेगा ग्रामीण जलापूर्ति योजना (साउथ साइड) 116 गांवों में जलापूर्ति लक्ष्य : मेसर्स श्याम इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट, लागत 247 करोड़ रुपए। 50-60% काम हुआ। बलियापुर ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजना, फेज-2 : वर्ष 2020 में शुरू हुई। एजेंसी मेसर्स श्याम इंजीनियरिंग, लागत 74.3 करोड़ रु, 15-20% काम बाकी। महुदा ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजना : वर्ष 2018-19 की योजना, लागत 10.68 करोड़, एजेंसी रामाधार सिंह एंड संस, योजना अधूरी, हैंडओवर नहीं।पथलगड़िया ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजना : वर्ष 2020-21 में शुरू, लागत 9.27 करोड़, शिव ज्योति इंटरप्राइजेज, योजना अधूरी, हैंडओवर नहीं। तोपचांची ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजना : वर्ष 2021-22, एजेंसी आदित्या आरवदेव कंस्ट्रक्शन, लागत 26.6 करोड़, योजना अधूरी, हैंडओवर नहीं। {टुंडी-पूर्वी टुंडी ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजना : वर्ष 2022-23 में शुरू, लागत 74.5 करोड़, एजेंसी दरोगा प्रधान, योजना अधूरी, हैंडओवर नहीं। बाघमारा एवं आसपास ग्रामीण जलापूर्ति योजना, फेज-2 : वर्ष 2022-23 में शुरू, लागत 16.29 करोड़, एजेंसी आदित्या आरवदेव, योजना अधूरी, हैंडओवर नहीं।
श्रीराम ईपीसी की 5 योजनाएं ठप {निरसा-गोविंदपुर मेगा ग्रामीण जलापूर्ति योजना, (नॉर्थ साइड) लागत ~674 करोड़, 30% काम भी नहीं। {बलियापुर जलापूर्ति योजना, फेज-1 : 2017-18 में शुरू हुई, लागत ~67.9 करोड़। 25% काम बाकी। {टुंडी-जाताखूंटी जलापूर्ति योजना : 2016-17 में शुरू, ~लागत 46.38 करोड़, 30-35% काम बाकी। {मोहलीडीह-लटानी जलापूर्ति योजना : 2017-18 में शुरू, लागत ~28.97 करोड़, 60% काम बाकी। {बाघमारा जलापूर्ति योजना फेज-1 : 2017-18 में शुरू। लागत ~93.8 करोड़। 30% काम बाकी।
शहर में भी राहत नहीं, 751 करोड़ की 2 योजनाएं अधूरी…
झमाडा शहरी जलापूर्ति जीर्णोद्धार योजना : वर्ष 2020 में शुरू हुई, कुल लागत 310 करोड़, एजेंसी जेएमसी। 30-40% काम बचा हुआ।
धनबाद शहरी जलापूर्ति योजना फेज : वर्ष 2021 में योजना शुरू, कुल लागत 441.5 करोड़, एजेंसी एलएंडटी कंपनी, 20% काम बाकी।
इजराइल की टहल कंपनी भी हो चुकी है ब्लैकलिस्ट जल जीवन मिशन के तहत जिले की पांच प्रमुख ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का काम एक ही कंपनी श्रीराम ईपीसी प्रालि. को दिया गया है। इनमें सबसे प्रमुख निरसा-गोविंदपुर मेगा जलापूर्ति योजना का काम वर्ष 2015-16 में शुरू हुआ। तब इसकी लागत 625 करोड़ रुपए थी। इसे इजराइल की टहल कंपनी को मिला था। लेटलतीफी के कारण 2023-24 में इसे डिबार घोषित कर योजना को 2 भागों में बांट दिया गया। लागत 921 करोड़ हो गई।

