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भास्कर न्यूज|गिरिडीह गिरफ्तार नक्सली एरिया कमांडर अजय महतो का झारखंड के 8 जिलों में आतंक का नेटवर्क फैला था। पारसनाथ इलाके में वह टाईगर के नाम से चर्चित था तो सारंडा इलाके में भाकपा माआेवादी एरिया कमांडर अजय महतो और मोछू के नाम से जाना जाता था। गिरिडीह के अलावा चाईबासा जिले को उसने लाल आतंक का गढ़ बना रखा था। झारखंड के विभिन्न जिलों में दर्ज 240 कांडों में सर्वाधिक 107 केस उस पर चाईबासा जिले में था। जबकि गिरिडीह जिले में 68 कांडों का अभियुक्त रहा है। ऐसे में झारखंड का आतंक बने अजय महतो उर्फ मोछू उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की नक्सल विरोधी अभियान में अब तक की सबसे बड़ी उपलिब्ध है। लंबी पूछताछ के बाद शनिवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तार नक्सली स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य है और 25 लाख का ईनामी है। पीरटांड़ थाना क्षेत्र के नवाडीह गांव का रहने वाला अजय महतो पिछले दो दशकों से झारखंड के कई जिलों में आतंक का दूसरा नाम बना हुआ था। उस पर हत्या, आईईडी ब्लास्ट, पुलिस पर हमला और सरकारी संपत्तियों को उड़ाने जैसे कुल 240 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। वर्तमान में वह सारंडा क्षेत्र का आतंक बना हुआ था। पुलिस को 17 जुलाई 2026 को खुफिया रिपोर्ट मिली थी कि वह खुखरा थाना क्षेत्र के हरलाडीह ओपी अंतर्गत जंगली इलाकों में पहुंचा है, जहां कुछ विध्वंसकारी घटनाओं को अंजाम देकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए रणनीति तैयार करना था। इसी बीच डीजीपी के मार्गदर्शन में गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार और कोबरा 209 बटालियन के कमांडेंट सौरभ भटनागर ने एक विशेष टीम का गठन किया और गिरिडीह एएसपी सुरजीत कुमार और कोबरा के कंपनी कमांडर आकिफ अहमद बानी को कमान सौंपी गयी। फिर तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर ग्राम पिपराडीह के खवासटांड़ टोला के घने जंगलों की घेराबंदी की गई। खुद को घिरा देख अजय महतो ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उसे धर दबोचा। इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में एएसपी सुरजीत कुमार, कोबरा के असिस्टेंट कमांडेंट आकिफ अहमद बानी, शुभम फले, इंस्पेक्टर मेघराज राउत, सब-इंस्पेक्टर अरुण शर्मा के साथ पीरटांड़ थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह, मधुबन थाना प्रभारी दीपेश कुमार, खुखरा थाना प्रभारी रविंद्र कुमार, हरलाडीह ओपी प्रभारी नीरज कुमार, खुखरा थाने के नरेंद्र कुमार यादव और कोबरा 209 व जिला बल के जवान शामिल थे। 2005 में बना था दस्ता सदस्य, आक्रामक नीति से बना सैक मेंबर नक्सल संगठन में अजय महतो का कद कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2005 में वह एक अदने से दस्ता सदस्य के रूप में शुरुआत करने वाला शख्स लेवी वसूलने और पुलिस मुठभेड़ों में हथियार लूटने की अपनी आक्रामक नीति के कारण महज तीन सालांे के भीतर पारसनाथ का एरिया कमांडर और फिर सैक सदस्य बन गया। पारसनाथ के अलावा झुमरा, लुगु पहाड़ और सारंडा जैसे घने जंगलों में उसके कई सेफ हाइडआउट्स थे। लेवी न देने पर उसने एक आम नागरिक की हत्या कर उसकी लाश को बीच चौराहे पर फेंक दिया था। वहीं, पुलिस मुखबिरी के शक में एक दंपती की गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। 2017 में झारखंड बंद के दौरान सरिया थाना क्षेत्र में चिचांकी रेलवे स्टेशन के पास डाउन रेलवे पटरी को बम से उड़ा दिया था। इसके अलावा पीरटांड़ में प्रखंड कार्यालय, जेवीएम दफ्तर और पंचायत भवन को भी डायनामाइट से उड़ाया था। मुख्यधारा में लौटें भटके लोग : एसपी शनिवार को प्रेस वार्ता मंे गिरिडीह एसपी डॉ बिमल कुमार ने कहा कि अजय महतो की गिरफ्तारी झारखंड को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कामयाबी है। क्षेत्र में लगातार चल रहे अभियानों के कारण जिला लगभग नक्सल मुक्त होने की कगार पर है। नक्सलियों और उग्रवादी संगठनों के सदस्यों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ दें। वे सरकार की पुनर्वास नीति “नई दिशा – एक नई पहल” का लाभ उठाकर प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण करें।

