Saturday, May 2, 2026

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4 जोन में बंटेगा सहरसा शहर:जलजमाव से निपटने की तैयारी को लेकर विधायक I.P. गुप्ता ने दी जानकारी


सहरसा शहर में मानसून से पहले जलजमाव की गंभीर समस्या से निपटने के लिए स्थानीय विधायक और आईपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आई.पी. गुप्ता ने एक विस्तृत योजना की घोषणा की है। शनिवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने प्रशासन, नगर निगम और जनता की संयुक्त भागीदारी वाले इस ‘मास्टर प्लान’ का विवरण दिया। विधायक गुप्ता ने बताया कि सहरसा अपने स्थापना काल से ही जलजमाव की समस्या से जूझ रहा है। इस बार मानसून आने से पहले ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, ताकि बारिश के दिनों में नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। 46 वार्डों को चार अलग-अलग जोन में बांटा जाएगा योजना के तहत, शहर के सभी 46 वार्डों को चार अलग-अलग जोन में बांटा जाएगा, जिसमें प्रत्येक जोन में लगभग 11 वार्ड होंगे। जलजमाव की गंभीरता के आधार पर इन इलाकों को ‘रेड जोन’, ‘येलो जोन’, ‘ग्रीन जोन’ और ‘ड्राई जोन’ में चिन्हित किया जाएगा। सटीक मौसम पूर्वानुमान और बारिश की संभावनाओं का डेटा पटना के बिड़ला तारामंडल (मौसम/विज्ञान केंद्र) से मंगवाया गया है, ताकि आवश्यक तैयारियों का आकलन किया जा सके। प्रेस वार्ता में विधायक ने शहर की जमीनी हकीकत भी बताई। उन्होंने कहा कि सहरसा के घरों से प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ 85 लाख लीटर से अधिक गंदा पानी निकलता है, लेकिन इसके निपटारे के लिए ड्रेनेज सिस्टम अपर्याप्त है। शहर के स्थापना काल से अब तक मात्र 4.5 से 5.5 प्रतिशत हिस्से में ही नालों (कच्चे, पक्के और कवर्ड) का निर्माण हो पाया है। मौजूदा नालों से भी पानी की निकासी ठीक से नहीं हो पाती, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा, “अक्सर हम केवल नगर निगम पर आरोप मढ़ते हैं। लेकिन हमें समझना होगा कि निगम के पास सीमित संसाधन हैं। इस बार जनता को बताया जाएगा कि हमारे पास क्या-क्या संसाधन (सक्शन मशीन आदि) उपलब्ध हैं और उनका सही इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।” दो चरणों में होगी बैठक विधायक ने पब्लिक पार्टिसिपेशन (जनभागीदारी) पर जोर देते हुए बताया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में पहली बार सीधा जनता को शामिल किया जा रहा है। पहला चरण: चारों जोन में अलग-अलग बैठकें होंगी। इसमें विधायक, नगर आयुक्त, निगम के इंजीनियर और आम नागरिक मौजूद रहेंगे। इस बैठक में वार्ड पार्षदों को नहीं रखा जाएगा, ताकि जनता बिना किसी संकोच के अपनी वास्तविक समस्या और सुझाव ‘फ्री हैंड’ होकर रख सके। दूसरा चरण: जनता से मिले फीडबैक के बाद, उसी जोन के वार्ड पार्षदों, नगर निगम के अधिकारियों और कर्मियों के साथ दूसरी बैठक होगी। सहरसा के लिए अपनी तरह का पहला अप्रोच इन बैठकों के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद इलाकों में जाकर ‘ग्राउंड जीरो’ पर ड्रेनेज और जलजमाव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे। तय किया जाएगा कि निचले इलाकों (लो-लैंड एरिया) से पानी निकालकर किस आउटलेट में गिराया जाए। विधायक ने अंत में कहा कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और जनता के इस संयुक्त प्रयास से ही मानसून में होने वाले जलजमाव के संकट को काफी हद तक कम (मिटिगेट) किया जा सकेगा। यह सहरसा के लिए अपनी तरह का पहला अप्रोच है।

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