
Ration Card News: पश्चिम बंगाल के खाद्य व आपूर्ति विभाग ने अप्रैल से लेकर अब तक यानी 6 महीने में 11.12 लाख से अधिक फर्जी राशन कार्ड रद्द किये हैं. सूत्रों के अनुसार, वैसे तो राशन कार्डों को रद्द करने की आधिकारिक प्रक्रिया एक अप्रैल से चालू है, लेकिन नयी सरकार के सत्ता में आने के बाद जून से इस कार्रवाई ने पूरी रफ्तार पकड़ी है.
SIR के आधार पर ब्लॉक हो रहे राशन कार्ड
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाये गये हैं, उनमें मृत, विस्थापित और दोहरे नाम वाले लोग शामिल हैं. इसी आधार पर ये राशन कार्ड भी ब्लॉक किये जा रहे हैं.
मृत लोगों के राशन कार्डों को रखा गया था जिंदा
खाद्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक रद्द किये गये 11.12 लाख कार्ड मुख्य रूप से उन लोगों के हैं, जिनकी मौत हो चुकी है. पिछले 15 वर्षों में राज्य में एक ऐसा मजबूत और भ्रष्ट गठजोड़ तैयार हो गया था, जहां मृत व्यक्तियों के राशन कार्डों को जान-बूझकर सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा रखा गया.
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मुफ्त चावल-गेहूं को खुले बाजार में बेचते थे डीलर
अधिकारी ने बताया कि इन कार्डों पर मिलने वाली सब्सिडी का मुफ्त चावल और गेहूं राशन डीलर और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त माफिया उठा लेते थे. फिर उसे खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था. राशन घोटाला मामले में ममता बनर्जी सरकार में खाद्य मंत्री रहे ज्योतिप्रिय मलिक को गिरफ्तार भी किया गया था.
अगले चरण में अवैध घुसपैठियों के राशन कार्ड होंगे रद्द
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मृतकों के राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जांच का रुख उन लोगों की तरफ मुड़ेगा, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिये राशन कार्ड बनवा लिये हैं. इसमें फोकस अवैध घुसपैठियों पर होगा.
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घुसपैठियों ने बनवा लिये हैं वोटर आईडी और राशन कार्ड
अधिकारी ने कहा कि खासकर वैसे लोग, जो राज्य में अवैध रूप से रह रहे हैं. उन्होंने फर्जीवाड़ा करके मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड बनवा लिये हैं. सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं. ऐसे लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
घोटाले की संभावना को खत्म करने के लिए कार्रवाई
खाद्य आपूर्ति विभाग ने कहा है कि इस सफाई अभियान का मुख्य उद्देश्य घोटाले की संभावनाओं को जड़ से खत्म करना है, ताकि सरकारी खाद्य सब्सिडी का लाभ केवल राज्य के वास्तविक और जरूरतमंद नागरिकों को ही मिले.
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