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रांची के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों को बिहार, छत्तीसगढ़, एमपी व हरियाणा के प्रतिनिधियों से कम मिलता है मानदेय
झारखंड में नगर निकायों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को पड़ोसी राज्य बिहार, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम मानदेय मिलेगा। क्योंकि, नगर विकास विभाग ने आठ वर्ष पहले तय किए गए मानदेय के आधार पर ही भुगतान करने की स्वीकृति दी है। फिलहाल मानदेय बढ़ोत्तरी से संबंधित प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में नगर निगम के मेयर को प्रति माह 10 हजार, डिप्टी मेयर को 9 हजार और पार्षदों को 7 हजार रुपए मानदेय दिए जाएंगे। यह मानदेय अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम है। मेयर को जहां 10 हजार प्रतिमाह मानदेय और वाहन व भत्ता के रूप में 25 हजार रुपए मिलते हैं, वहीं बिहार में यह करीब 40 हजार रुपए है। डिप्टी मेयर को 15 हजार रुपए के अलावा वाहन व अन्य भत्ता, पार्षदों को 12 हजार रुपए मिलते हैं। छत्तीसगढ़ में मेयर को प्रति माह 11 हजार के अलावा अन्य भत्ते मिलते हैं। हरियाणा में मेयर को वाहन, ड्राइवर के अलावा 30 हजार मिलते हैं। सीनियर डिप्टी मेयर को 25 हजार और डिप्टी मेयर को 20 हजार व पार्षदों को 15 हजार रुपए मिलते हैं। वहीं, मध्यप्रदेश में मेयर को 26400 रुपए व अन्य भत्ता, पार्षदों को 14400 रुपए मिलते हैं। इससे जनप्रतिनिधियों में काफी नाराजगी है। मानदेय मिलने से बढ़ेगा मनोबल, प्रतिनिधियों की जवाबदेही होगी तय मानदेय मिलने के बाद जनप्रतिनिधियों का मनोबल बढ़ेगा और उनकी जवाबदेही भी तय होगी। जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा होती है कि वे रोजाना अपने वार्ड में उपलब्ध रहें, लोगों की शिकायतों को सुने और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं। अभी कई मुहल्लों में प्रतिनिधि नियमित भ्रमण नहीं करते हैं। इस वजह से सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, साफ- सफाई, पानी सहित अन्य समस्या से प्रभावित लोग अपनी बात अपने प्रतिनिधियों तक नहीं पहुंचा पाते हैं। क्षेत्र भ्रमण बढ़ने से आम लोगों तक पार्षद पहुंच पाएंगे और समस्याओं का समाधान भी करा पाएंगे। अगले सप्ताह 4 माह का मानदेय एक साथ मिलेगा रांची नगर निगम के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को चुनाव जीतने के चार माह बाद भी मानदेय नहीं मिला है। मेयर-डिप्टी मेयर और 53 वार्डों के पार्षद बिना मानदेय के काम कर रहे हैं। क्योंकि, रांची नगर निगम ने मानदेय बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव नगर विकास विभाग को भेजा था,लेकिन विभाग की ओर से इसमें बढ़ोत्तरी पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। पुराने मानदेय के आधार पर ही भुगतान की स्वीकृति दी गई। सभी जनप्रतिनिधियों को अगले सप्ताह एक साथ चार माह के मानदेय का भुगतान किया जाएगा। अभी तक सभी प्रतिनिधि अपने संसाधन से क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं। वार्डों में विकास कार्यों की निगरानी, लोगों की समस्याओं का समाधान, योजनाओं का निरीक्षण और बैठकों में भागीदारी जैसी जिम्मेदारियों के निर्वहन का खर्च अपने पॉकेट से कर रहे हैं।
