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बिहार सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए 9 बड़े पहल किए हैं। राज्य में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने को मंजूरी दी गई है। महिलाओं को उच्च शिक्षा पाने में सुविधा हो इसके लिए अलग से महिला विश्वविद्यालय बनेगा। विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना और टीचर ट्रेनिंग यूनिवर्सिटी बनाने को लेकर भी फैसले लिए गए हैं। सरकार ने शिक्षा व्यवस्था बेहतर करने के लिए कौन से 9 बड़े फैसले लिए हैं। पढ़िए रिपोर्ट..। सबसे पहले सबसे बड़ा फैसला, प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने की मंजूरी उच्च शिक्षा के लिए होने वाले पलायन को रोकने के लिए सरकार ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी संशोधन विधेयक 2026 लेकर आई। इससे नए प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने का रास्ता आसान हुआ है। ऐसे 5 यूनिवर्सिटी खुलने वाले हैं। ये हैं… हिमालयन यूनिवर्सिटी: यह विश्वविद्यालय अरुणाचल के ईटानगर में स्थित है। 2013 में इसकी स्थापना की गई। यूजीसी से मान्यता प्राप्त इस संस्थान में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, डिप्लोमा, पीएचडी, बीटेक, एमटेक, बीबीए, एबीए और बीएड आदि कोर्स हैं। पटना में इसे खोला जाएगा। शांजा विश्वविद्यालय: मधबुनी में शांजा विश्वविद्यालय स्थापित होगी। इसमें एमबीबीएस, नर्सिंग, बीएड आदि की पढ़ाई होगी। बी.जी. विश्वविद्यालय: सीवान में बी.जी. विश्वविद्यालय की स्थापना होगी। एस.ए. विश्वविद्यालय: नवादा के अशोक नगर में एस. ए. फाउंडेशन की ओर से इसकी स्थापना की जा रही है। औरंगाबाद: जसोइया मोड़ पर सीतयोग इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के माध्यम से सीतयोग विश्वविद्यालय की स्थापना होगी। यहां इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और पत्रकारिता के साथ ही एग्रीकल्चर व अन्य तकनीकी कोर्स कराए जाएंगे। अब जानिए शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने वाले 8 बड़े फैसलों के बारे में 1- फिर से होगी विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना नालंदा विश्वविद्यालय की तरह बिहार सरकार ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय की गरिमा की वापसी कराएगी। विक्रमशिला यूनिवर्सिटी भागलपुर जिले के कहलगांव में स्थित है। यह बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा का बड़ा सेंटर रही है। इसकी स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी। आज विक्रमशिला यूनिवर्सिटी खंडहर है। विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना फिर से की जाएगी। इसके लिए 220 एकड़ जमीन की मंजूरी सरकार ने दी है। 2- शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय बनेगा बिहार में करीब 7 लाख सरकारी शिक्षक हैं। इन्हें नियमित ट्रेनिंग, क्षमता विकास और एआई आधारित आधुनिक टीचिंग टेक्निक की ट्रेनिंग देनी है। इसके लिए टीचर ट्रेनिंग यूनिवर्सिटी बनेगी। 3- महिला विश्वविद्यालय महिलाओं को उच्च शिक्षा पाने में सुविधा हो इसके लिए सरकार महिला विश्वविद्यालय की स्थापना करेगी। इसमें सिर्फ छात्राओं का एडमिशन होगा। वाइस चांसलर, प्रोफेसर, शिक्षक, अधिकारी सभी महिलाएं होंगी। 4- पीएचडी बालिका फेलोशिप स्कीम सरकार ने मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप स्कीम लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत सरकार हर वर्ष 1000 चयनित छात्राओं को पीएचडी और रिसर्च के लिए राशि देगी। लाभुकों को चार साल तक हर माह 10-10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिलेगी। यानी एक छात्रा को पूरे चार वर्ष में लगभग 4.80 लाख रुपए मिलेंगे। 55 करोड़ रुपए के बजट से यह स्कीम लागू होगी। इससे लड़कियों को रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। 5- एआई और डिजिटल शिक्षा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और बच्चों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर इंप्रूव करने के लिए गूगल से समझौता किया गया है। इससे स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक एआई आधारित लर्निंग को बढ़ावा मिलेगा। शिक्षकों को एआई और आधुनिक डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जाएगी। चुनिंदा स्कूलों में एआई लैब स्थापित होंगे। 6- बीएचयू की शाखा खुलेगी शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने घोषणा की है कि बिहार में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का कैंपस खोलने के लिए सरकार बीएचयू प्रशासन और केन्द्र सरकार से बातचीत करेगी। प्रस्ताव मंजूर होने पर बिहार सरकार जमीन और अन्य सुविधाएं देने को तैयार है। इससे फायदा होगा कि बीएचयू जैसे नामचीन विश्वविद्यालय की पढ़ाई बिहार में ही प्राप्त हो सकेगी। रिसर्च, इंजीनियरिंग, मेडिकल और सामाजिक विज्ञान में पढ़ाई के अच्छे अवसर मिलेंगे। राज्य में ही रहकर पढ़ाई कर सकेंगे। 7- बिहार में एनएसडी की शाखा खुलेगी राज्य में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) का कैंपस खोलने की दिशा में सहमति मिल गई है। इससे थिएटर और अभिनय से जुड़ा राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण बिहार में मिल सकेगा। बिहार के कलाकारों को मंच और स्कॉलरशिप मिलेगी। राज्य के युवाओं को रंगमंच और फिल्म में करियर बनाने का अवसर मिलेगा। 8- तीन विशेष समितियों का गठन परीक्षा सुधार समिति: राज्य में विभिन्न आयोगों द्वारा आयोजित परीक्षा में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। आगे ऐसी परेशानी नहीं हो इसके लिए सरकार ने परीक्षा सुधार समिति का गठन किया है। समिति के अध्यक्ष पटना हाई कोर्ट के जज हरीश कुमार हैं। समिति का मकसद सभी सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के सिस्टम में सुधार करना है। समिति पेपर लीक रोकने के उपाय, परीक्षा प्रक्रिया को कैसे सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए, प्रश्न पत्रों की छपाई, वितरण से जुड़ी सेफ्टी, डिजिटल निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, आदि के साथ ही बीपीएससी, बीएसएससी, बीसीईसीईबी सहित विभिन्न भर्ती एजेंसियों के लिए एक समान मानक प्रक्रिया कैसे हो इस पर अपनी राय देगी। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेष सहयोग शिविर: शिक्षा में सुधार और छात्रों की समस्यों के जल्द से जल्द निपटारे के लिए विशेष सहयोग शिविरों का आयोजन तय किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को जानना, उनसे सुझाव लेना और शिक्षा सुधार के लिए नीतियां बनाना है। असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए कमेटी: असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली मुद्दे पर छात्रों ने आंदोलन किया। इसके बाद सरकार ने विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव देने को एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगी, जिसमें आयु, पात्रता मानदंड, परीक्षा और साक्षात्कार का स्वरूप, विभिन्न मापदंडों का सापेक्ष महत्व, गेस्ट लेक्चर से जुड़े मुद्दे और अन्य संबंधित पहलू शामिल हैं।
9 स्टेप्स से बदलेगा बिहार का हायर एजुकेशन:5 नई प्राइवेट यूनिवर्सिटी, महिलाओं के लिए अलग विश्वविद्यालय, जानें क्या-क्या बदलने जा रहा

