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Ritesh Madhav: 87 Blood Donations

विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर कोडरमा के रितेश माधव की कहानी समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आई है। महज 45 वर्ष की आयु में 87 बार रक्तदान कर चुके रितेश ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक व्यक्ति भी कई जिंदगियां बचा सकता है।

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जेजे कॉलेज कोडरमा में कार्यरत रितेश नियमित अंतराल पर रक्तदान करते हैं। जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उनका मानना है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि इससे सीधे किसी की जान बचाई जा सकती है।

महज 45 वर्ष की आयु में 87 बार रक्तदान कर चुके रितेश ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक व्यक्ति भी कई जिंदगियां बचा सकता है।

महज 45 वर्ष की आयु में 87 बार रक्तदान कर चुके रितेश ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक व्यक्ति भी कई जिंदगियां बचा सकता है।

छात्र जीवन में लिया संकल्प, आज भी निभा रहे

रितेश माधव ने वर्ष 2000 में पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान पहली बार रक्तदान किया था। यह अवसर विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक शिविर में मिला। उसी समय उन्होंने 101 बार रक्तदान करने का संकल्प लिया था।

इस लक्ष्य को पाने के लिए वह लगातार हर तीन से चार महीने के अंतराल पर रक्तदान करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने रक्त की कमी से लोगों को जूझते देखा, तभी यह संकल्प और मजबूत हुआ। आज भी वह उसी प्रतिबद्धता के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

रितेश माधव ने वर्ष 2000 में पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान पहली बार रक्तदान किया था।

रितेश माधव ने वर्ष 2000 में पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान पहली बार रक्तदान किया था।

कोरोना काल और आपात स्थितियों में भी आगे रहे

रितेश ने कोरोना काल की कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि उस समय भी उन्होंने रक्तदान करने की इच्छा जताई थी, लेकिन संक्रमण के खतरे को देखते हुए उन्हें अस्पताल में मना कर दिया गया।

इसके बावजूद उन्होंने कई बार ऐसी स्थितियों का सामना किया, जब लोगों को तुरंत रक्त की आवश्यकता थी।

दो वर्ष पहले एक सड़क हादसे में घायल महिला के लिए उन्होंने सदर अस्पताल में रक्तदान कर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां रितेश ने मानवता की मिसाल पेश की है।

रितेश कहते हैं कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी जिम्मेदारी ले, तो किसी को भी रक्त की कमी से जान नहीं गंवानी पड़ेगी।

रितेश कहते हैं कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी जिम्मेदारी ले, तो किसी को भी रक्त की कमी से जान नहीं गंवानी पड़ेगी।

हर व्यक्ति जिम्मेदारी ले तो नहीं होगी ब्लड की कमी

रितेश बताते हैं कि रक्तदान करने के बावजूद वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। सामान्य जीवन जीते हैं। इसके लिए किसी विशेष डाइट की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने रक्तदान की तुलना कुएं के पानी से करते हुए कहा कि जैसे पानी को उपयोग में लाना जरूरी है

वैसे ही रक्तदान भी शरीर के लिए लाभकारी है। उनके इस कार्य के लिए उन्हें जिला और राज्य स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। रितेश कहते हैं कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी जिम्मेदारी ले, तो किसी को भी रक्त की कमी से जान नहीं गंवानी पड़ेगी।

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