मघड़ा हादसे को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त है।
नालंदा में स्थित मघड़ा शीतला माता मंदिर में बीती 31 मार्च को भगदड़ मची थी। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस हादसे को लेकर बिहार के पुलिस महानिदेशक और नालंदा के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर चार हफ़्तों के भीतर
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प्रशासनिक लापरवाही के कारण गई 8 जान
बता दें कि 31 मार्च को मघड़ा शीतला माता मंदिर में कुप्रबंधन और भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं। इस संबंध में नालन्दा निवासी दिल्ली के एडवोकेट ब्रजेश सिंह ने 2 अप्रैल को आयोग में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे 18 जून को आयोग के सामने विचार के लिए रखा गया।
शिकायतकर्ता ने आयोग का ध्यान इस गंभीर प्रशासनिक विफलता की ओर खींचते हुए आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन ने मंदिर की सुरक्षा में भारी लापरवाही बरती। घटना के वक्त मंदिर परिसर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं थी, क्योंकि पुलिस और प्रशासनिक संसाधनों को उसी समय नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में चल रहे राष्ट्रपति के दौरे की सुरक्षा में लगा दिया गया था।

अधिवक्ता ने मुआवजा और उच्च स्तरीय जांच की उठाई मांग।
NHRC ने दिए सख्त निर्देश
आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन माना और कानून प्रभाग के संयुक्त रजिस्ट्रार इंद्रजीत कुमार के माध्यम से अधिकारियों को पत्र जारी किया। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि शिकायत की एक प्रति नालंदा SP और बिहार DGP को भेजी जाए।
दोनों वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में हुई चूक और अब तक की गई कार्रवाई पर 4 हफ़्तों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपें। इस मामले को चार हफ़्तों के बाद दोबारा आयोग के समक्ष समीक्षा के लिए पेश किया जाए।
उच्च-स्तरीय जांच और मुआवजे की मांग
शिकायतकर्ता एडवोकेट ब्रजेश सिंह ने इस पूरे मामले की एक उच्च-स्तरीय जांच कराने, लापरवाह और दोषी कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।

