झारखंड के सरकारी कॉलेजों में साइंस की पढ़ाई की व्यवस्था बदलेगी। अब हर कॉलेज में साइंस की पढ़ाई नहीं होगी। इसके लिए कॉलेज तय कर दिए गए हैं। राजधानी रांची में 2026-30 सत्र में रांची यूनिवर्सिटी के सिर्फ तीन कॉलेज-डोरंडा कॉलेज, रांची वीमेंस कॉलेज और मारवा
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- पहले सभी कॉलेजों में होती थी साइंस की पढ़ाई
- साइंस में 1260 सीटों पर दाखिला होगा
इसी तरह जमशेदपुर में पहले चार कॉलेजों में साइंस की पढ़ाई होती थी, लेकिन अब सिर्फ ग्रेजुएट कॉलेज, को-ऑपरेटिव कॉलेज और एलबीएसएम कॉलेज में साइंस की पढ़ाई होगी। हालांकि धनबाद शहर के दोनों कॉलेजों में साइंस की पढ़ाई जारी रहेगी। -शेष पेज 11 पर
राजधानी के तीन कॉलेजों में किस विषय में कितनी सीटें
- डोरंडा कॉलेज में हिंदी, अंग्रेजी, जियोलॉजी, भूगोल, पर्यावरण विज्ञान, इतिहास, राजनीति विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, क्षेत्रीय भाषाओं और वोकेशनल कोर्सों की भी पढ़ाई होगी। यहां सभी विषयों में 62 असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 12 पद हैं। प्रोफेसर का एक भी नहीं।
- भूगोल, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, वाणिज्य, अर्थशास्त्र और वोकेशनल कोर्सों की भी पढ़ाई होगी। छात्राओं के लिए साइंस सबसे बड़ा विकल्प यही कॉलेज होगा। यहां असिस्टेंट प्रोफेसर के 83, एसोसिएट प्रोफेसर के 21 पद हैं। प्रोफेसर का एक भी नहीं।
- इस कॉलेज में कॉमर्स, अर्थशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र वोकेशनल कोर्सों की भी पढ़ाई होगी। यहां असिस्टेंट प्रोफेसर के 52 और एसोसिएट प्रोफेसर के 9 पद हैं। जबकि प्रोफेसर का एक भी पद नहीं है।
अन्य सरकारी कॉलेजों की भी भूमिका बदली… राजधानी के अन्य कॉलेजों की भी नई भूमिका तय कर दी गई है। जेएन कॉलेज, धुर्वा में इतिहास, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी, वाणिज्य और अर्थशास्त्र पर फोकस रहेगा। आरएलएसवाई कॉलेज में भूगोल, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, मानवशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी, टीआरएल वाणिज्य और अर्थशास्त्र की पढ़ाई होगी। वहीं एसएस मेमोरियल कॉलेज में भूगोल, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, वाणिज्य, अर्थशास्त्र और विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम संचालित होंगे।
फायदा क्या… विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता एक ही परिसर में बढ़ेगी
विज्ञान शिक्षा के लिए तीन मजबूत केंद्र विकसित करने की तैयारी है, ताकि प्रयोगशालाओं और उपकरणों का बेहतर उपयोग हो सके। विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता एक ही परिसर में बढ़ेगी। शोध और प्रयोगात्मक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। लैब-लाइब्रेरी अपग्रेड होने पर छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन मिलेगा।
और चुनौती… चयन का विकल्प कम
नई व्यवस्था में छात्रों के पास पसंदीदा कॉलेज चुनने का विकल्प कम होगा। विद्यार्थियों को आवास के पास कॉलेज होने के बाद भी दूसरे कॉलेज में साइंस विषय के लिए दाखिला लेना पड़ेगा। इससे छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। तीन कॉलेजों पर छात्र संख्या का दबाव बढ़ सकता है।

