
कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट
Concast Steel scam: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने कॉन्कास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड (सीएसपीएल) से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 20 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. इन संपत्तियों की कुल बाजार कीमत लगभग 31.30 करोड़ रुपये बतायी गयी है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गयी है.
पूरे देश में फैली है संपत्ति
अटैच की गई संपत्तियों में आवासीय मकान, व्यावसायिक यूनिट, फ्लैट और जमीन के कई टुकड़े शामिल हैं, जो पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और नयी दिल्ली में स्थित हैं. ईडी की जांच में सामने आया कि इन संपत्तियों का वास्तविक नियंत्रण और लाभ संजय कुमार सुरेका के पास था. संपत्तियां सीधे उनके नाम या फिर रिश्तेदारों, कर्मचारियों, सहयोगियों और शेल कंपनियों के नाम पर रखी गयी थीं, ताकि अपराध से अर्जित धन को छिपाया जा सके.
अब तक 777.10 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
ईडी के मुताबिक, मौजूदा कार्रवाई के साथ इस मामले में अब तक कुल लगभग 777.10 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं. इसी मामले में ईडी ने कोलकाता की विशेष पीएमएलए अदालत में दूसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की है. इस नयी चार्जशीट में 63 अतिरिक्त आरोपियों को शामिल किया गया है. इनमें व्यक्ति, कंपनियां, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्म और प्रोप्राइटरशिप संस्थान शामिल हैं. जांच एजेंसी का दावा है कि ये सभी आरोपी जानबूझकर अपराध से अर्जित धन को वैध बनाने की प्रक्रिया में शामिल थे.
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिया था कर्ज
ईडी ने इस मामले की जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआइआर के आधार पर शुरू की थी. सीबीआई, बीएसएफबी कोलकाता ने संजय कुमार सुरेका और अन्य के खिलाफ आइपीसी की विभिन्न धाराओं और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के तहत मामला दर्ज किया था. प्राथमिकी में आरोप है कि कॉन्कास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड और उसके प्रमोटरों तथा निदेशकों ने बैंकों के कंसोर्टियम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारी कर्ज लिया.
बढ़ा-चढ़ाकर जमा हुए स्टॉक स्टेटमेंट
जांच में पाया गया कि कंपनी ने बढ़ा-चढ़ाकर स्टॉक स्टेटमेंट जमा किये, वित्तीय विवरणों में हेरफेर किया और फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर बैंकों को गुमराह किया. इसके बाद लोन की रकम को डायवर्ट और शिफॉन ऑफ कर दिया गया. इस धोखाधड़ी से बैंकों और वित्तीय संस्थानों को 6210.72 करोड़ रुपये (ब्याज छोड़कर) का नुकसान हुआ.
60 से अधिक शेल कंपनियां
सीएसपीएल, जिसे संजय कुमार सुरेका प्रमोट करते थे, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में एकीकृत स्टील निर्माण इकाइयां संचालित करती थी. ईडी की जांच में सामने आया कि सुरेका ने बेहद जटिल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क तैयार किया था. इसके लिए उन्होंने 60 से अधिक शेल कंपनियां, फर्म और एलएलपी बनायी थीं. इन संस्थाओं का उपयोग अपराध से अर्जित धन को इधर-उधर घुमाने, लेयरिंग करने और अंततः उसे वैध संपत्तियों में बदलने के लिए किया गया.
हाई-वैल्यू एसेट खरीदे गये
जांच एजेंसी के अनुसार, एकोमोडेशेन एंट्रीज, अनसिक्योरड लोन्स, इंटर-कार्पोरेट ट्राजैंक्शन्स, बुक एडजस्टमेंट और सर्कुलर फंड मुवमेंट के जरिये धन को कई स्तरों पर स्थानांतरित या घुमाया गया. बाद में इसी पैसे से संपत्तियां, निवेश और अन्य हाई-वैल्यू एसेट खरीदे गये. ईडी ने यह भी पाया कि संजय सुरेका के करीबी रिश्तेदारों और सहयोगियों द्वारा नियंत्रित कई कंपनियां इस पूरे नेटवर्क में सक्रिय रूप से शामिल थीं. उन्होंने अपराध की रकम को रूट, लेयर और डिप्लॉय करने में मदद की.
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कुल आरोपियों की संख्या 97
इससे पहले भी ईडी इस मामले में एक मूल प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट और एक सप्लीमेंट्री कंप्लेंट दाखिल कर चुकी है. दूसरी सप्लीमेंट्री कंप्लेंट दाखिल होने के बाद अब इस केस में कुल आरोपियों की संख्या 97 हो गयी है. इनमें व्यक्ति, कंपनियां, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्म और अन्य कारोबारी इकाइयां शामिल हैं. ईडी ने साफ किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं.
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