
NEET UG 2026 Paper Leak: लखीसराय पहुंचते ही ईओयू के शीर्ष अधिकारियों ने जिला अतिथि गृह (सर्किट हाउस) में स्थानीय एसडीपीओ शिवम कुमार व अन्य पुलिस कप्तानों के साथ हाई-लेवल मीटिंग की. इसके तुरंत बाद डीआईजी सीधे तेतरहाट थाना पहुंचे, जहां बीते 21 जून को पकड़े गए सॉल्वर गैंग और फर्जीवाड़े के 30 आरोपियों को 72 घंटे की पुलिस रिमांड पर लेकर आमने-सामने बिठाकर कड़ाई से पूछताछ शुरू कर दी गई है.
तेतरहाट थाने में कैंप कर रही ईओयू की स्पेशल टीम
नीट परीक्षा में सेंधमारी करने वाले इस अंतरप्रांतीय गिरोह के तार लखीसराय से गहरे जुड़े होने के इनपुट मिले थे. रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से राज उगलवाने के लिए ईओयू की तकनीकी विंग और साइबर एक्सपर्ट्स भी तेतरहाट थाने में कैंप कर रहे हैं. जांच एजेंसी का मुख्य फोकस परीक्षा लीक के मुख्य सरगना (किंगपिन) और इस रैकेट के वित्तीय लेनदेन (मनी ट्रेल) का पता लगाना है.
गिरफ्तार किए गए 30 आरोपियों का पूरा प्रोफाइल (वर्गीकरण)
तेतरहाट पुलिस और ईओयू द्वारा शिकंजे में लिए गए आरोपियों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है, जो यह दर्शाता है कि यह धांधली कितने सुनियोजित तरीके से की जा रही थी:
- फर्जी अभ्यर्थी (स्कॉलर/सॉल्वर): 09
- बायोमेट्रिक कर्मी (पहचान छिपाने वाले): 18
- स्थानीय सहयोगी/बिचौलिए: 02
- मूल अभ्यर्थी (कैंडिडेट): 01
मोबाइल क्लोनिंग और जब्त डेटा से मिलेंगे अचूक डिजिटल साक्ष्य
सूत्रों के अनुसार, 21 जून की छापेमारी के वक्त आरोपियों के पास से दर्जनों महंगे स्मार्टफोन, एडमिट कार्ड और कई संदिग्ध कागजात बरामद हुए थे. ईओयू की टीम पूछताछ के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच केंद्रित कर रही है:
- रैकेट का मुख्य सरगना: देश के किन बड़े शिक्षा माफियाओं के इशारे पर लखीसराय में यह सॉल्वर गैंग ऑपरेट हो रहा था.
- सफेदपोशों से कनेक्शन: लखीसराय जिले के वे कौन से स्थानीय रसूखदार, लॉज संचालक या सफेदपोश हैं जिन्होंने इन बाहरी शूटरों/स्कॉलर्स को पनाह दी थी.
- वित्तीय और तकनीकी साक्ष्य: प्रति छात्र कितने लाख रुपये की डील हुई थी और इसके लिए किन बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल किया गया.
लखीसराय के कई ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल तेतरहाट थाने के बंद कमरों तक सीमित नहीं रहेगी. रिमांड पर लिए गए आरोपियों के कबूलनामे और उनके मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के आधार पर लखीसराय के शहरी और ग्रामीण इलाकों के कई संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा सकती है. पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अगले 48 घंटों के भीतर इस धांधली से जुड़े कई ऐसे चौंकाने वाले चेहरे बेनकाब होंगे, जिनके नाम अब तक गुप्त थे. पूरी तफ्तीश पर पटना मुख्यालय की भी सीधी नजर बनी हुई है.

