Monsoon Session All Party Meeting: ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करके नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए सांसदों को लेकर दिल्ली की सियासी हलचल तेज हो गयी है. लोकसभा सदस्य सुदीप बंद्योपाध्याय निचले सदन में एनसीपीआई के सदन के नेता बन सकते हैं. शताब्दी रॉय को उप नेता और काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक (Chief Whip) नियुक्त किये जाने की संभावना है. संसद के मानसून सत्र से पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) में एनसीपीआई को आमंत्रित किये जाने की प्रबल संभावना जतायी जा रही है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले बागी सांसद
खबर है कि सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी. इस बैठक के दौरान उन्होंने एनसीपीआई के सभी 20 लोकसभा सांसदों के सदन में बैठने की व्यवस्था और नये संसद भवन में पार्टी कार्यालय के आवंटन पर विस्तृत चर्चा की.

एनडीए को समर्थन देने की प्रक्रिया जारी
संसदीय मान्यता की प्रक्रिया के बीच एनसीपीआई नेताओं की यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि सुदीप बंद्योपाध्याय ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी. भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए एनसीपीआई से नरेंद्र मोदी सरकार और एनडीए को समर्थन देने से जुड़ा औपचारिक पत्र सौंपने को कहा गया है.
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तृणमूल कांग्रेस ने दायर की है अयोग्यता याचिका
एक तरफ एनसीपीआई अपने संसदीय दल को संगठित कर रही है, तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़ने वाले सभी 20 बागी सांसदों के खिलाफ कानूनी लड़ाई छेड़ रखी है. लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत सभी 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी हैं. उनका तर्क है कि दूसरे दल में शामिल होकर इन सांसदों ने स्वेच्छा से तृणमूल की सदस्यता त्याग दी है. हालांकि, सोमवार को हुई बैठक में अयोग्यता याचिकाओं का मुद्दा नहीं उठा.
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तृणमूल के बागी गुट के साथ हैं 20 सांसद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी में बगावत शुरू हो गयी और एक के बाद एक सांसद और विधायक उनसे अलग होते चले गये. तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को अपना नेता मानने से इनकार करते हुए दो तिहाई बहुमत से खुद को असली तृणमूल घोषित कर दिया. बाद में इन्होंने एनसीपीआई में पार्टी के विलय की बात कही.
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