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ममता बनर्जी को लगा तगड़ा झटका, मदन मित्रा का TMC से इस्तीफा

ममता बनर्जी को लगा तगड़ा झटका, मदन मित्रा का TMC से इस्तीफा

Madan Mitra Resigns Mamata Banerjee TMC: पत्नी और बेटों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का समन मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के करीबी विधायक मदन मित्रा ने अपना ‘कमरा’ बदल लिया है. तृणमूल कांग्रेस कालीघाट गुट छोड़कर वह रीतब्रत बनर्जी गुट में शामिल हो गये हैं. TMC के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और कमरहट्टी से विधायक मदन मित्रा ने बुधवार को कहा कि वह ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं, लेकिन अब कालीघाट वाली टीएमसी के साथ नहीं हैं.

एक दिन पहले ईडी ने पत्नी और बेटों को भेजा था समन

मदन मित्रा ने पार्टी के सभी सांगठनिक और राष्ट्रीय-राज्य समितियों के पदों से इस्तीफा देते हुए रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी टीएमसी गुट का दामन थाम लिया. एक दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका भर्ती घोटाला से जुड़े धन शोधन (Money Laundering) मामले में मदन मित्रा की पत्नी और उनके दोनों बेटों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है.

मैंने सिर्फ कमरा बदला है, घर नहीं : मदन मित्रा

बागी गुट के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रीतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद मदन मित्रा ने पत्रकारों से कहा- मैंने विधानसभा में सिर्फ अपना कमरा बदला है, घर नहीं. मैं अभी भी टीएमसी में ही हूं, लेकिन मैंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली समिति के सभी सांगठनिक पदों और मुख्य सचेतक (Chief Whip) के पद से इस्तीफा दे दिया है.

ये भी पढ़ें: बंगाल : सवालों के घेरे में मदन मित्रा का परिवार, भर्ती भ्रष्टाचार मामले में ईडी करेगी पूछताछ

ममता बनर्जी ने मदन को बनाया था राज्य समिति का महासचिव

कुछ ही दिन पहले ममता बनर्जी ने मदन मित्रा को पार्टी की राज्य समिति में महासचिव (General Secretary) नियुक्त किया था. लेकिन इस नियुक्ति के चंद दिनों के भीतर ही उन्होंने बगावत का रास्ता चुन लिया.

‘चाहे हर कोई मर जाये, सिर्फ अभिषेक को बचाना है’

तृणमूल कांग्रेस कालीघाट का साथ छोड़ने के बाद लंबे समय तक ममता बनर्जी के वफादार रहे मदन मित्रा ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हमला बोल दिया. उन्होंने आंतरिक संकट का जिक्र करते हुए कहा- मैंने अभिषेक बनर्जी को सुझाव दिया था कि वे 6 महीने या एक साल के लिए पद से हट जाएं, ताकि हम सब मिलकर पार्टी को दोबारा खड़ा कर सकें, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. अब पार्टी की नैया डूब चुकी है, नाव पानी के नीचे है. जनता मर रही है, लेकिन पार्टी को मजबूर किया जा रहा है कि चाहे हर कोई मर जाये, सिर्फ अभिषेक को बचाना है. पूरी पार्टी अब सिर्फ एक व्यक्ति की सेवा में सिमट कर रह गयी है.

जून में ED ने मदन के ठिकानों पर की थी छापेमारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय एजेंसी ईडी (ED) की कार्रवाई के बाद मदन मित्रा ने यह बड़ा फैसला लिया है. 14 जुलाई को ही ईडी ने उनके बेटों स्वरूप मित्रा, शुभरूप मित्रा और पत्नी अर्चना मित्रा को अगले हफ्ते बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है. इससे पहले जून में ईडी ने मदन मित्रा के भवानीपुर और कालीघाट स्थित ठिकानों पर छापेमारी भी की थी.

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