पटना21 मिनट पहले
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हिन्दुओं के सभी शुभ और मांगलिक कार्य आज शनिवार से चार महीने के लिए थम जाएंगे। आज से चातुर्मास शुरू हो रहा है। अब हरिशयन एकादशी से लेकर देवोत्थान एकादशी तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे। चातुर्मास के बाद ही अब शहनाई की गूंज सुनाई देगी।
सनातन धर्मावलंबियों के सभी शुभ कार्य विवाह, जनेऊ, मुंडन, द्विरागमन, भूमि पूजन जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। हालांकि, इन चार महीनों के दौरान हिन्दुओं के सभी प्रमुख व्रत-त्योहार की भरमार रहेगी।
हरिशयन एकादशी पर ब्रह्म योग का संयोग
आचार्य राकेश झा ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी आज शनिवार को अनुराधा नक्षत्र व ज्येष्ठा नक्षत्र तथा ब्रह्म योग एवं जयद् योग के सुयोग में मनायी जाएगी। इस एकादशी का व्रत साधु, संत, वैष्णवजन एवं गृहस्थजन एक साथ करेंगे।
एकादशी के दिन विधि-विधान से भगवान नारायण की पूजा कर उन्हें चार मास के लिए शयन करा दिया जाएगा। फिर कार्तिक शुक्ल एकादशी 20 नवंबर शुक्रवार को श्रीहरि जागृत होंगे। साधु-संत, संन्यासी चातुर्मास के दौरान एक जगह अपना आसन जमाकर भजन-कीर्तन, भगवत गुणगान, कथा-प्रवचन आदि धार्मिक कृत्य करेंगे।

योगनिंद्रा के आगोश में रहेंगे श्रीहरि विष्णु
ज्योतिषी झा ने ब्रह्मवैवर्त्त पुराण के हवाले से कहा कि योगनिंद्रा के तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान नारायण ने उसे चार मास के लिए अपने नेत्रों में स्थान दिया और कहा कि तुम मेरी वर्ष में चार मास के लिए मेरी नेत्रों में निवास करोगी। तब से चार मास के लिए श्री विष्णु शयन के लिए क्षीर सागर में चले जाते है। इन चार मास में ब्रह्मचर्य का पालन, व्यसन का त्याग, मौन, जाप, ध्यान, दान-पुण्य, स्नान-व्रत आदि विशेष फलदायी होता है।

आचार्य राकेश झा।
29 को प्रीति योग में गुरु पूर्णिमा
ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा में 29 जुलाई शुक्रवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र एवं प्रीति योग के शुभ संयोग में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। श्रद्धालु शिष्यजन इस दिन अपने गुरुजनों को ब्रह्मा-विष्णु-महेश के सदृश मानते हुए अपनी श्रद्धा के अनुरूप उनकी पूजा करेंगे।
इस दिन गुरु के प्रति सम्मान व कृतज्ञता प्रकट किया जाएगा। सनातन धर्म मे गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। गुरु कृपा से ही शांति, आंनद व मोक्ष की प्राप्ति होती है।


