‘हिन्दुस्तान’ के लोकप्रिय मतदाता जागरूकता कार्यक्रम ‘आओ राजनीति करें’ के तहत बुधवार को गुरुग्राम कार्यालय में आयोजित संवाद में कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्यरत नौकरीपेशा लोगों ने अपने…
‘हिन्दुस्तान’ के लोकप्रिय मतदाता जागरूकता कार्यक्रम ‘आओ राजनीति करें’ के तहत बुधवार को गुरुग्राम कार्यालय में आयोजित संवाद में कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्यरत नौकरीपेशा लोगों ने अपने विचार और मुद्दे रखे। देश के दूसरे राज्यों और शहरों से आए लोगों ने कहा कि गुरुग्राम का एक सिर्फ हिस्सा सिंगापुर न बने, बल्कि पूरे शहर का समुचित और समावेशी विकास होना चाहिए, तभी यह शहर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगा, तभी हम इसकी तुलना दुनिया के अच्छे शहरों से कर पाएंगे। प्रोफेशनल इसके लिए मजबूत और प्रभावी पहल होनी चाहिए।
एक बड़ी कंपनी में निदेशक और गरीब तबके के बच्चों के फ्री पाठशाला चलाने वाले रोशन सिंह कहा गुरुग्राम बड़ा तो रहा है, लेकिन सुव्यवस्थित विकास नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे गाजियाबाद के वैशाली से 2014 में गुरुग्राम आए थे, लेकिन यह शहर तमाम चीजों में दूसरे शहरों से बहुत अलग नहीं है। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात है कि लोग सुरक्षित महसूस करें। गुरुग्राम में लोगों की सुरक्षा बहुत प्रभावी नहीं है। हर वक्त सुरक्षा का डर रहता है, उन्होंने कहा कि इसके अलावा एक बहुत बड़ा वर्ग हैं जो बुनियादी चीजों से वंचित है। शिक्षा बहुत महंगी है। इस दिशा में काम होना चाहिए, ताकि इस शहर में सभी का शिक्षा मिल सके।
आईटी कंपनी नगारो में वरिष्ठ पद पर कार्यरत रवीश श्रीवास्तव ने प्रदूषण को बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि वह शहर 2013 में आए थे, लेकिन शहर के प्रदूषण लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इसकी बड़ी वजह है कि शहर में हरियाली की कमी है। दिल्ली की तर्ज पर शहर के बीच में जो खाली जगहें पड़ी हैं वहां पर रिज फॉरेस्ट बनाने पड़ेंगे तभी यह शहर आगे रहने योग्य होना। उन्होंने कहा हरियाली देखकर सुकून मिलता है, हम खुश रहते हैं। उन्होंने दूसरा बड़ा मुद्दा उठाया कि शहर में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। उन्होंने कहा यह चीज डराती है। किसी भी शहर को लोग रहने के तभी चुनते हैं जब वह सुरक्षित हो? उन्होंने इस ओर नीति-निर्धारकों का फोकस नहीं है।
प्राथमिक ढांचा ही नहीं
लंबे समय तक कई बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों में मानव प्रबंधन (एचआर) का काम कर चुकी डीएलएफ फेस-5 की निवासी नीना भट्टाचार्जी ने कहा कि 2003 से गुरुग्राम में हैं। उन्होंने भी माना कि प्रदूषण बड़ा मुद्दा है और सबको प्रभावित करता है इसके बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा इस शहर में प्रोफेशनल और पढ़े-लिखे लोगों की अच्छी तादाद है, इस शहर को बहुत अच्छा बनाया जा सकता है। जनभागीदारी वाले अभियान होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए यहां के प्रशासन का रुख लचीला होना चाहिए, कुछ लोग जो आगे आते हैं उन्हें पूरा सहयोग नहीं मिलता तो वह पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बिल्डरों ने बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बना दीं क्या उस अनुपात में फॉरेस्ट बढ़ा है। नीना ने कहा कि इस शहर में पांच सितारा अस्पताल तो हैं, लेकिन प्राथामिक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मोहल्ला क्लीनिक जैसी चीजों की पहल होनी चाहिए। तभी यह शहर सभी के रहने योग्य बनेगा। उन्होंने कहा कि इलाज नहीं मिलने लोगों की मौत हो जाती है, क्योंकि वे महंगा इलाज करवा नहीं सकते हैं।
सेक्टर-40 स्थित लॉ कॉलेज में प्रोफेसर विरेन्द्र सिन्धू ने कहा कि राजनीतिक तंत्र पर प्रहार किया। उन्होंने कहा ऐसा तंत्र बना गया है कि लोगों को गिने-चुने चेहरों में से किसी को जनप्रतिनिधि चुनना पड़ता है। उन्होंने 95 फीसदी लोग बिना इस बात की चिंता किए ही वोट दे देते हैं कि आमुख व्यक्ति उनके लिए क्या करेगा? उन्हें किसे वोट देना चाहिए? किसे नहीं देना चाहिए। सिन्धू ने कहा कि कोई कुछ भी कहे जनप्रतिनिधि विकास के प्रति गंभीर नहीं हैं। शहर के सस्कारी स्कूलों की हालत खराब है, ये बदतर स्थिति में हैं। सिन्धू ने कहा कि शहर को समावेशी विकास होना चाहिए। सभी लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके आलावा उन्होंने कहा द्वारका एक्सप्रेस-वे और खेड़कीदौला टोल जैसे मुद्दे सालों से लंबित ये हल क्यों नहीं होते हैं?
साइबर हब स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत नवदीप सिंह ने प्रदूषण, ट्रैफिक जाम को बड़ा मुद्दा बताया। नवदीप ने कहा कि वे चाहते हैं स्कूली शिक्षा सस्ती और अच्छी होनी चाहिए ताकि यहां पर नौकरी करने वाले लोग अपने बच्चों को आसानी से पढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना मजबूरी है क्योंकि सरकारी स्कूलों की स्थिति बदतर है। उन्होंने कहा कि इस शहर को बेतहर बनाने के लिए सुरक्षा के साथ बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
शिक्षा से ही सुधार संभव
वहीं, शहर के एक निजी स्कूल प्रवक्ता संगीता यादव ने शिक्षा और इसके साधनों की कमी पर फोकस किया। उन्होंने कहा शिक्षा बढ़ने पर तमाम चीजें अपने आप सुधरेंगी। इसके साथ ही उन्होंने एक सुझाव दिया कि मतदाताओं को जागरूक बनाया जाना चाहिए ताकि से सही प्रत्याशी का चुनाव कर सकें और किसी के बहकावे में न आएं।
भानुमति के कुनबे जैसी स्थिति : शांडिल्य
आईटी प्रोफेनशनल और क्लीन द एयर कैंपेन से जुड़े दिनेश शांडिल्य ने शहर की मौजूदा स्थिति की तुलना भानुमति के कुनबे से की। शांडिल्य ने कहा शहर में कोई एक मुद्दा नहीं। बहुत सारे मुद्दे हैं जो आपस में जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि न साफ हवा और न ही साफ पानी। उन्होंने कहा कि शहर हिस्सा बहुत विकसित है तो उसके पीछे के हालत बदतर हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि शहर में ढेरों दिक्कतें हैं लेकिन जनप्रतिनिधियों के लिए ये भी कोई मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा हम जैसे प्रोफेशनल अपने को ठगा महसूस करते हैं न साफ हवा न साफ पानी और न दूसरी सुविधाएं हमारे पास हैं। सड़कों की स्थिति भी जर्जर है।
लाखों खर्च के बाद ‘बेघर’
एक मल्टीनेशल टेलीकॉम कंपनी में काम करने के बाद स्टॉर्टअप शुरू करने वाले प्रखर सहाय ने कहा कि उन्होंने बहुत हसरतों से गुरुग्राम में एक फ्लैट खरीदा था लेकिन अभी तक वे उसमें नहीं रह पा रहे हैं क्योंकि सारे रुपये बिल्डर को देने के बाद उस क्षेत्र का विकास ही नहीं हो पाया है। रहने जैसी स्थिति नहीं बन पाई है। प्रखर ने कहा वे प्रोफेशनल से समाजिक कार्यकर्ता बन गए। आवाज उठाई फिर अभी तक चीजें नहीं मिल पाईं। प्रखर ने कहा कि गुरुग्राम में लाखों प्रोफेशनल ने अपनी गाढ़ी कमाई खर्च की है लेकिन उन्हें अभी तक घर नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने कहा जिन सोसाइटी में लोग रह भी रहे तो वे अपनी रिस्क और खतरे के साथ। वहां पर पूरी सुविधाएं नहीं हैं।

