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“मनीष साहब दो ही लोगों से बात करते हैं, एक प्रधानमंत्री और दूसरे अजीत डोभाल। देश की सुरक्षा की बात है, सीक्रेट लीक हो जाएगा तो क्या करेंगे? इसलिए लोगों को आसपास भटकने नहीं देते हैं। 12 साल से यहां रह रहे हैं। हफ्ते में कभी-कभार घर से निकलते हैं, फिर कुछ घंटे में ही घर वापस आ जाते हैं।” खगड़िया में परमेश्वरी भवन में काम करने वाले युवक लोगों से यही कहकर मनीष गुप्ता का इंट्रोडक्शन देते थे। दैनिक भास्कर से बातचीत में पड़ोसी अजय ने 12 सालों के पूरे हाव-भाव को दर्शाया। दरअसल, शनिवार को जमालपुर बाजार स्थित 5 कट्ठा में फैले परमेश्वरी भवन के मालिक मनीष गुप्ता को दिल्ली की सूचना पर गिरफ्तार किया गया है। मनीष गुप्ता कौन है, वह क्या करता था, जिससे अरबों की संपत्ति बना ली? पुलिस ने कैसे गिरफ्तार किया? पड़ोसियों ने क्या-क्या बताया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… परमेश्वरी भवन की एक हफ्ते तक रेकी करती रही पुलिस दैनिक भास्कर रिपोर्टर की आधिकारिक सूत्रों और अन्य जानकारियों के मुताबिक, आज से करीब 10 दिन पहले दिल्ली से पटना प्रशासन को मनीष गुप्ता के खिलाफ छापेमारी के लिए सूचना मिली थी। इसके बाद पटना प्रशासन की ओर से खगड़िया एसपी को जानकारी भेजी गई। एसपी ने डीआईयू और एसटीएफ समेत 12 सदस्यीय टीम तैयार की। इस टीम का नेतृत्व डीएसपी को सौंपा गया। टीम तैयार होने के बाद करीब एक सप्ताह तक पटना से पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने मनीष गुप्ता के परमेश्वरी भवन के आसपास रेकी की। इस दौरान घर और आसपास के पूरे माहौल की जानकारी जुटाई गई। घर में कितने लोग रहते हैं, बाहर से कौन-कौन लोग आते हैं, वे क्यों आते हैं, आने वाले लोग दोबारा आते हैं या वही लोग बार-बार आते हैं, इन सभी बिंदुओं पर नजर रखी गई। हाउस अरेस्ट कर एक-एक कमरे की तलाशी ली गई ठीक एक सप्ताह बाद शनिवार को करीब ढाई बजे लगभग 15 लोगों की टीम परमेश्वरी भवन पहुंची। पुलिस के पहुंचते ही मनीष गुप्ता भड़क गया और पुलिस के लोगों को ही धमकाने लगा, हालांकि 15 लोगों की टीम के सामने उसका रौब नहीं चल पाया, डीएसपी को उसने अपने आईएएस होने का पहचान पत्र दिखाया। जिसे पुलिस ने फर्जी करार करते हुए हाउस अरेस्ट कर उसे एक कमरे में बैठाया। इसके बाद पूरे घर की तलाशी ली गई। पुलिस ने एक-एक कमरे को खंगाला। तलाशी के दौरान घर से मिले पैसे, दस्तावेज और अन्य सामान को पुलिस ने अपने कब्जे में लिया और मनीष गुप्ता को साथ लेकर वहां से निकल गई। पिता प्रोफेसर हैं, भाइयों की प्राइवेट नौकरी, एक कनाडा में मनीष कुमार गुप्ता का परिवार शिक्षित और प्रतिष्ठित रहा है। उनके पिता परमेश्वर प्रसाद गुप्ता गोगरी-जमालपुर के केडीएस कॉलेज में प्रोफेसर थे। परिवार का यहां पुश्तैनी घर है। उनके बड़े भाई संजय कुमार गुप्ता दिल्ली में प्रोफेसर हैं, जबकि एक अन्य भाई डंपी कुमार कनाडा में रहते हैं। परिवार के अन्य भाई भी अलग-अलग शहरों में प्राइवेट कंपनियों में जॉब करते हैं। मोदी सरकार में प्रोमोशन, अंडर कवर एजेंट बना जमालपुर बाजार निवासी अजय ने बताया, “हम गांव के लोग यही जानते हैं कि मनीष गुप्ता दिल्ली में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से खगड़िया में रह रहे हैं। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद इलाके में रहते थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई भी दिल्ली में ही हुई है। वह एक आईएएस अधिकारी हैं और उनकी पोस्टिंग पीएमओ में है। पीएमओ से पहले वह यूपी सीएमओ में थे। मोदी सरकार आने के बाद से उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बनाया गया था। उनका कद इतना हाई-फाई था कि कोई व्यक्ति उनसे सीधे बात नहीं कर पाता था। इसलिए हम लोग भी उन्हें ऊपर-ऊपर से ही जानते थे। घर में काम करने वाले लोग जब भी बाहर आते थे और उनसे हमारी बात होती थी तो वे बताते थे कि मनीष साहब सिर्फ दो लोगों से बात करते हैं। एक प्रधानमंत्री और दूसरे अजीत डोभाल। इसके अलावा कोई तीसरा व्यक्ति नहीं होता था। वह घर से निकलकर सीधे दिल्ली जाते थे। उनकी टाइमिंग और शेड्यूल पहले से तय रहता था। वह 24 घंटे के भीतर दोबारा परमेश्वरी भवन लौट आते थे।” पड़ोसी दिनेश के मुताबिक, “मनीष के भाई अच्छे खासे काम करने वाले लोग हैं। परिवार की इलाके में इज्जत है। लेकिन मनीष का संपर्क अपने भाइयों में सिर्फ एक भाई से है, जो कनाडा में रहता है। मनीष अक्सर वहां जाता था, कुछ दिन पहले वह भाई भी इंडिया आया था। मुझे लगता है कि अगर वह यहां कुछ दिन और रहता तो पुलिस उसे भी उठा लेती।” घर में तालाब-गार्डन-प्राइवेट सिनेमा, 25 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे पड़ोसी के मुताबिक, करीब पांच कट्ठे की जमीन पर बने परमेश्वरी भवन में दुनिया के ऐशो-आराम की हर चीजें मौजूद है। जब से गाजियादबाद से मनीष पहुंचा, तब से लगातार भवन का निर्माण और रिमॉडलिंग की जा रही है। 12 सालों से मजदूर लगातार इसमें काम पर लगे हुए हैं। भवन की चहारदीवारी के भीतर एक छोटा पार्क और शानदार तालाब बनाया गया है। इसके अलावा एक प्राइवेट सिनेमा भी है। पूरे भवन में महंगी इटैलियन शैली की टाइल्स और आधुनिक साज-सज्जा का इस्तेमाल किया गया है। पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। घर के भीतर और बाहर होने वाली हर गतिविधि पर इन कैमरों के जरिए नजर रखी जाती थी। लेन बदलने, ऑटोमेटिक ब्रेक लगाने वाली टेस्ला कार जब्त
पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कार्रवाई के दौरान ‘Government of India’ और ‘IAS’ बोर्ड लगी टेस्ला कार एवं टाटा सफारी, 31.24 लीटर विदेशी शराब, बीयर, एप्पल के पांच आईफोन, दो मैकबुक, 20 क्रेडिट कार्ड, आठ डेबिट कार्ड, चार चेकबुक, कथित फर्जी पहचान पत्र तथा बारहसिंगा और हिरण के सींग बरामद किए गए। घर से महंगे ब्रांडेड कपड़े, लग्जरी सामान, विदेशी ड्राई फ्रूट्स और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी मिले। टेस्ला कार FSD (Full Self-Driving) आधारित असिस्टेड ड्राइविंग फीचर है, जिसे भारत में पूर्ण स्वायत्त संचालन की अनुमति नहीं है। टेस्ला कार में FSD (Full Self-Driving) आधारित फीचर है, जो ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर की मदद करता है। यह कार को लेन में बनाए रखने, ट्रैफिक के हिसाब से रफ्तार नियंत्रित करने, आगे कोई वाहन या रुकावट आने पर ब्रेक लगाने, मोड़ लेने और लेन बदलने जैसे कामों में सहायता करता है। कई राज्यों-विदेशों में भी बनाई संपत्ति
पुलिस के अनुसार, आरोपी की संपत्ति का आकलन किया जा रहा है। उसकी संपत्ति के सोर्स का भी पता लगाया जा रहा है। हालांकि इनमें एक सोर्स ये था कि वह खुद को पीएमओ अधिकारी बताकर लोगों से मोटे रूपए भी ऐंठने लगा था। इसके लिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) सहित अन्य एजेंसियों की सहायता ली जाएगी। पुलिस को यह भी सूचना मिली है कि आरोपी की संपत्ति बिहार के अलावा अन्य राज्यों और विदेशों में भी हो सकती है। इसकी जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके खिलाफ दर्ज मामलों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित फर्जी पहचान पत्र, बैंक कार्ड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किन-किन गतिविधियों में किया गया।
