रांची25 मिनट पहले
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रांची विश्वविद्यालय में करीब डेढ़ दशक से चल रही पीएचडी की पुरानी व्यवस्था अब बदल गई है। अब तक यूजीसी के 2009 के रेगुलेशन के आधार पर पीएचडी की प्रक्रिया चल रही थी। नई शिक्षा नीति-2020 और यूजीसी के 2022 के प्रावधानों के अनुरूप लंबे समय से नए नियम बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब यह कवायद पूरी हो गई है। कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की पहल पर नया पीएचडी रेगुलेशन तैयार किया गया है। रिसर्च डायरेक्टर एम. परवेज हसन की मॉनिटरिंग में तैयार इस रेगुलेशन को विवि प्रशासन ने मंगलवार को अधिसूचित कर दिया।
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए है। स्नातक ऑनर्स विद रिसर्च करने वाले विद्यार्थी 75% अंक अथवा निर्धारित समकक्ष सीजीपीए हासिल करने पर सीधे पीएचडी के लिए योग्य होंगे। यानी ऐसे विद्यार्थियों को पहले पारंपरिक दो वर्षीय पीजी करने की जरूरत नहीं होगी। वहीं मास्टर डिग्री या एमफिल वाले अभ्यर्थियों के लिए 55% अंक की पात्रता रखी गई है। निर्धारित आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को पात्रता अंक में 5% की छूट मिलेगी।
जानिए…वो तीन प्रमुख बदलाव
नेट-जेआरएफ क्वालिफाई अभ्यर्थियों को परीक्षा से छूट: राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों को पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में राहत दी गई है। यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट, गेट, गीट पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा से छूट और इंटरव्यू आधारित चयन का प्रावधान है। जो अभ्यर्थी विवि की प्रवेश परीक्षा देंगे, उनके प्रश्नपत्र में 50% सवाल रिसर्च मेथडोलॉजी और 50% संबंधित विषय से होंगे। परीक्षा-इंटरव्यू के लिए 70:30 का वेटेज है।
12 क्रेडिट का कोर्स वर्क जरूरी: पीएचडी में प्रवेश के बाद शोधार्थी को 12 क्रेडिट का कोर्स वर्क पूरा करना होगा। इसमें शोध पद्धति और शोध से जुड़े अकादमिक मानकों की जानकारी दी जाएगी। कोर्स वर्क में निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करना भी जरूरी होगा।
3 साल से पहले पूरी नहीं होगी पीएचडी: नए नियमों में पीएचडी की न्यूनतम अवधि 36 महीने यानी 3 वर्ष और अधिकतम अवधि 72 महीने यानी 6 वर्ष तय की गई है। री-रजिस्ट्रेशन के प्रावधान के तहत 8 वर्ष तक शोध पूरा करने का अवसर मिल सकता है। महिला शोधार्थियों और 40% से अधिक दिव्यांगता वाले शोधार्थियों को अतिरिक्त दो वर्ष की छूट मिलेगी। महिला शोधार्थियों के लिए 240 दिन तक मातृत्व/चाइल्ड केयर लीव का भी प्रावधान है।
रिसर्च कराने का कोटा हुआ आधा
| शिक्षक का पदनाम | अब शोधार्थी | पहले कितने |
| असिस्टेंट प्रोफेसर | 04 | 08 |
| एसोसिएट प्रोफेसर | 06 | 12 |
| प्रोफेसर | 08 | 16 |

