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यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के विरोध में रविवार को औरंगाबाद जिले के नवीनगर में सवर्ण समाज के लोगों ने एकजुट होकर न्याय यात्रा एवं आक्रोश मार्च निकाला। कार्यक्रम का आयोजन अनुग्रह नारायण स्टेडियम से किया गया। इसमें बड़ी संख्या में स्वर्ण समाज के युवा, छात्र और समाज के अन्य लोग शामिल हुए। स्टेडियम से निकली न्याय यात्रा बस स्टैंड, न्यू एरिया, मंगल बाजार होते हुए शनिचर बाजार चौक पहुंची। इसके बाद मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पुनः अनुग्रह नारायण स्टेडियम पहुंचा, जहां कार्यक्रम का समापन किया गया।मार्च के दौरान युवाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर और नारेबाजी करते हुए प्रस्तावित नियमों के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान पूरे शहर में युवाओं और समाज के लोगों की एकजुटता देखने को मिली। प्रस्तावित नियमों पर जताई आपत्ति कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने यूजीसी के प्रस्तावित नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर प्रत्येक छात्र और युवा का अधिकार है। ऐसे किसी भी प्रावधान को स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो। वक्ताओं ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य शिक्षा और रोजगार से जुड़ा है। इसलिए नियम बनाने से पहले उसके दूरगामी प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से प्रस्तावित नियमों को वापस लेने अथवा उनमें आवश्यक सुधार करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि समाज किसी भी मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के लिए एकजुट है। आंदोलन जारी रखने का ऐलान आक्रोश मार्च में शामिल युवाओं ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, सम्मान और समान अवसर जैसे मुद्दों पर समाज को एक मंच पर आकर अपनी बात मजबूती से रखनी होगी। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के भविष्य से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा। प्रस्तावित नियमों पर सरकार द्वारा पुनर्विचार नहीं किए जाने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक रूप देने की बात भी कही गई। कार्यक्रम के अंत में समाज के लोगों ने एकजुटता बनाए रखने और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने का संकल्प लिया। UGC का नया नियम क्या है, जिसका विरोध हो रहा है? विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ नाम से एक नोटिफिकेशन जारी किया। जिसे 15 जनवरी से देशभर के यूनिवर्सिटी-कॉलेज में लागू कर दिया गया। सरकार का दावा है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्म स्थान, विकलांगता के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। UGC के नए नियम के मुताबिक, हर यूनिवर्सिटी-कॉलेज को EOC बनाना जरूरी है। दरअसल, 17 दिसंबर 2012 से UGC से मान्यता प्राप्त सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में जातीय भेदभाव रोकने के लिए कुछ नियम बनाए गए थे। उसका नाम ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ था। 13 जनवरी को UGC का नया नियम भी उसी कानून को आगे बढ़ाता है।
औरंगाबाद में यूजीसी के प्रस्तावित नियमों का विरोध:सवर्ण समाज ने आक्रोश मार्च निकाला, कहा- छात्रों और युवाओं के भविष्य से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
