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सीवान मॉडल सदर अस्पताल में रविवार को बिजली कटते ही अस्पताल की लिफ्ट दो महिला कर्मियों के लिए करीब एक घंटे तक कैदखाना बनी रही। पावर बैकअप फेल होने से लिफ्ट पहली और दूसरी मंजिल के बीच अटक गई। इसमें सवार जीविका की दो महिला कर्मी अंदर फंस गईं। हैरानी की बात यह रही कि उन्हें तत्काल बाहर निकालने के लिए अस्पताल में कोई प्रभावी आपात व्यवस्था नहीं थी। यहां तक कि महिलाओं को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए अस्पताल में उपयुक्त सीढ़ी तक उपलब्ध नहीं मिली। आखिरकार लिफ्ट से बाहर निकालने के बाद पुरुष कर्मियों ने दोनों महिलाओं को गोद में उठाकर नीचे पहुंचाया। देखें, मौके से आई तस्वीरें… बिजली बहाल हुई, लेकिन लिफ्ट नहीं चली बताया जाता है कि दोनों महिला कर्मी ड्यूटी के लिए अस्पताल पहुंची थीं। वे लिफ्ट से ऊपर जा रही थीं, तभी अचानक बिजली गुल हो गई। पावर बैकअप ने काम नहीं किया और लिफ्ट पहली व दूसरी मंजिल के बीच रुक गई। करीब दस मिनट बाद अस्पताल की बिजली आपूर्ति बहाल हो गई, लेकिन लिफ्ट चालू नहीं हुई। अंदर फंसी महिलाओं के मोबाइल में नेटवर्क नहीं था, जिससे वे फोन कर मदद भी नहीं मांग सकीं। शोर सुनने के बाद कर्मचारियों को मिली जानकारी काफी देर तक लिफ्ट के अंदर से महिलाओं के शोर मचाने के बाद सफाई कार्य में लगे कर्मियों ने उनकी आवाज सुनी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई। कर्मचारियों ने लिफ्ट चालू करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को भी आपात स्थिति में लिफ्ट खोलने की प्रक्रिया और उनकी जिम्मेदारी की स्पष्ट जानकारी नहीं थी। निर्माणाधीन भवन से बुलाना पड़ा कर्मचारी जब अस्पताल कर्मियों से लिफ्ट नहीं खुली तो बगल में निर्माणाधीन एमसीएच भवन में काम कर रहे कर्मचारियों को सूचना दी गई। करीब एक घंटे बाद निर्माण एजेंसी का एक कर्मचारी मौके पर पहुंचा। उसने चाबी की मदद से लिफ्ट का गेट खोला, जिसके बाद दोनों महिलाओं को बाहर निकाला जा सका। बाहर निकलने के बाद भी नहीं मिली सीढ़ी लिफ्ट से महिलाओं के बाहर आने के बाद उन्हें नीचे ले जाने में भी अस्पताल की व्यवस्था की पोल खुल गई। अस्पताल में ऐसी आपात स्थिति के लिए उपयुक्त सीढ़ी उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद पुरुष कर्मियों ने दोनों महिलाओं को गोद में उठाकर नीचे उतारा। तीन साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी मॉडल सदर अस्पताल भवन का निर्माण बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) ने कराया है। निर्माण के बाद तीन साल तक लिफ्ट समेत अन्य उपकरणों के रखरखाव की जिम्मेदारी बीएमएसआईसीएल की बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार लिफ्ट में बार-बार खराबी आने की शिकायत को लेकर बीएमएसआईसीएल के अधिकारियों से कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। समीक्षा बैठक के अगले दिन ही फंस गईं महिलाएं खास बात यह है कि घटना से ठीक एक दिन पहले शनिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में भी मॉडल सदर अस्पताल की लिफ्ट का मुद्दा उठा था। डीएम स्तर से बीएमएसआईसीएल के डीजीएम से लिफ्ट की स्थिति को लेकर जानकारी मांगी गई थी। इसके अगले ही दिन दो महिलाओं के लिफ्ट में फंसने की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा, रखरखाव और आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधीक्षक बोले- सुरक्षाकर्मियों को भी दी जाएगी चाबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि लिफ्ट की एक चाबी अस्पताल प्रशासन के पास उपलब्ध है। अब ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मियों को भी लिफ्ट की चाबी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आपात स्थिति में लिफ्ट में फंसे लोगों को तत्काल बाहर निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि लिफ्ट की समस्या को लेकर बीएमएसआईसीएल के अधिकारियों को पहले भी कई बार पत्राचार किया गया है।
सीवान सदर अस्पताल की लिफ्ट फंसी 2 महिलाएं:1 घंटे बाद चाबी से खोला गेट; सीढ़ी तक नहीं मिली, गोद में उठाकर निकाला
