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झारखंड में फर्जी पते पर शेल कंपनियां बनाकर जीएसटी चोरी करने वाले माफिया के खिलाफ वाणिज्यकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सर्विलांस शाखा द्वारा 452 कंपनियों की स्थलीय जांच में 74 कारोबारी अपने रजिस्टर्ड पते से गायब मिले। इन फर्मों ने कागजों पर करीब 500 करोड़ रुपए की खरीद-बिक्री दर्ज कराई थी। जांच में गायब मिले 74 कारोबारियों में से 68 मामले (92%) जमशेदपुर, हजारीबाग और धनबाद से जुड़े हैं। अकेले जमशेदपुर में 42.71 करोड़ की जीएसटी गड़बड़ी सामने आई है। हजारीबाग में 39.81 करोड़ और धनबाद में 16.40 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। अधिकतर फर्में कोयला, छड़ और स्क्रैप व्यवसाय से जुड़ी हैं। जीएसटी की इंटेलिजेंस एंड रेवेन्यू एनालिसिस यूनिट ने 5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली संदिग्ध फर्मों के डेटा विश्लेषण के आधार पर जांच शुरू की थी। दो वित्तीय वर्षों (2025-26 एवं 2026-27) में 900 संदिग्ध फर्में चिह्नित की गईं। जिलावार गायब फर्म व टैक्स गड़बड़ी ऐसे करते हैं फर्जीवाड़ा पुराने जीएसटी फर्जीवाड़े की परछाई फिर दिखी जमशेदपुर में जीएसटी फर्जीवाड़े की जांच में पहले भी स्क्रैप-लोहा कारोबार से जुड़ी फर्जी कंपनियों का नेटवर्क सामने आ चुका है। पुराने मामले में 100 से अधिक फर्जी कंपनियों के जरिए करीब 730 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े की जांच हुई थी। फर्जी कंपनियों और चालान के जरिए जमशेदपुर-कोलकाता के कारोबारियों के कनेक्शन भी सामने आए थे। भास्कर एक्सपर्ट मानव केडिया, वरीय अधिवक्ता (जीएसटी) फर्जी दस्तावेज से शुरू होता है खेल… कारोबारी बिजली बिल या जमीन के म्यूटेशन के फर्जी कागजात और अपने गरीब कर्मचारियों के दस्तावेज लगाकर रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं। लेकिन आधार व बायोमीट्रिक सत्यापन तथा मोबाइल ट्रैकिंग के जरिए असली सूत्रधार तक पहुंचा जा सकता है।
जमशेदपुर में 20 पते पर नहीं मिले प्रतिष्ठान:कागज पर 500 करोड़ का कारोबार, जांच हुई तो 74 फर्मों का पता गायब
