![]()
भास्कर न्यूज | गिरिडीह गिरिडीह जिले के सरकारी स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की कमी का असर विद्यालयों के शैक्षणिक और प्रशासनिक संचालन पर पड़ रहा है। जिले में कुल 3147 सरकारी स्कूल हैं, लेकिन इनमें केवल प्लस टू हाई स्कूल बेंगाबाद में एक स्थायी प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं। शेष 3146 स्कूल प्रभारी प्रधानाध्यापकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। लंबे समय से चली आ रही इस प्रभारी व्यवस्था के कारण नियमित शिक्षण के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने वाले शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। स्थिति यह है कि पिछले 9 वर्षों से प्रधानाध्यापक पद पर न तो नई नियुक्ति हुई है और न ही शिक्षकों को नियमित प्रोन्नति मिल सकी है। इससे वर्षों से प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों में असंतोष है। वहीं, स्कूलों में प्रशासनिक निर्णय, विभागीय पत्राचार, विद्यालय विकास कार्य, मध्याह्न भोजन योजना और शिक्षकों की मॉनिटरिंग समेत कई जिम्मेदारियां प्रभारी एचएम को ही संभालनी पड़ रही हैं।स्थायी प्रधानाध्यापक को विद्यालय संचालन और प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए निर्धारित अधिकार प्राप्त होते हैं। इसके विपरीत प्रभारी प्रधानाध्यापक को सीमित अधिकारों और वित्तीय शक्तियों के साथ विद्यालय की बड़ी जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं। उन्हें बच्चों को पढ़ाने के साथ विभागीय कामकाज, रिकॉर्ड संधारण, मध्याह्न भोजन, विद्यालय विकास और अन्य प्रशासनिक कार्य भी देखने होते हैं। इससे उनके नियमित शिक्षण कार्य के लिए उपलब्ध समय प्रभावित होता है। 877 मध्य विद्यालयों में एचएम का पद ही नहीं जिले के 877 मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद ही स्वीकृत नहीं है। ऐसे विद्यालयों का संचालन प्रभारी व्यवस्था के तहत किया जा रहा है। खासकर उत्क्रमित मध्य विद्यालयों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाई के लिए स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति हुई और ग्रेड-4 शिक्षकों को सहायक आचार्य के पद पर समायोजित किया गया, लेकिन एचएम के पदों के सृजन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। 450 बच्चे वाले उत्क्रमित स्कूल में भी एचएम का पद नहीं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत स्कूलों में आवश्यक शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। जिले में ऐसी स्थिति सामने आ रही है, जहां अपेक्षाकृत कम छात्र संख्या वाले सामान्य मध्य विद्यालयों में एचएम का पद स्वीकृत है, जबकि कई उत्क्रमित मध्य विद्यालयों में छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद प्रधानाध्यापक का पद स्वीकृत नहीं है। पद स्वीकृत नहीं होने के कारण इन स्कूलों में नियमित एचएम की नियुक्ति भी संभव नहीं हो पा रही है।
जिले के 3147 सरकारी स्कूलों में केवल एक स्थायी एचएम, बाकी 3146 प्रभारियों के भरोसे
