![]()
भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले के 20 विद्यालयों में पिछले पांच वर्षों से पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। इनमें कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं, जहां करीब एक दशक से पेयजल संकट बना हुआ है। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में इन विद्यालयों में पढ़ने वाले चार हजार विद्यार्थियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। कई बच्चे घर से बोतल में पानी लेकर विद्यालय पहुंचते हैं। सबसे अधिक परेशानी मध्याह्न भोजन के दौरान होती है, जब भोजन के साथ पानी की आवश्यकता होती है। हालांकि जिन विद्यालय को ड्राई जोन घोषित किया गया है, वहां दो-तीन बार बोरिंग किया जा चुका है, मगर पानी नहीं निकल सका। पेयजल संकट से जूझ रहे विद्यालयों में सबसे अधिक संख्या रंका प्रखंड की है। यहां 11 विद्यालयों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा बड़गड़ प्रखंड के चार, चिनियां के दो और विशुनपुरा, बंशीधर नगर व रमकंडा के एक-एक विद्यालय शामिल हैं। ^विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए पेयजल व स्वच्छता विभाग को पत्र लिखा गया है। जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को पेयजल के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। -अनुराग मिंज, डीएसई इन विद्यालयों में पेयजल संकट जिले के रंका प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय कंचनपुर, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय कबीरदास नगर खपरो, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बुधियाडेरा बरदरी, उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय गोदरमाना, न्यू प्राथमिक विद्यालय दक्षिण टोला भौरी, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय टिटही महुआ, न्यू प्राथमिक विद्यालय निमियांटीकर होहेंकला, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय उरांव टोला खुरा, न्यू प्राथमिक विद्यालय कुपा टोला, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय अमाटांड़ नगरी और उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय पाल्हे। चिनियां प्रखंड के न्यू प्राथमिक विद्यालय चफला समेत अन्य में पेयजल की समस्या है।
मध्याह्न भोजन के लिए घर से बोतल में पानी लाते हैं छात्र-छात्राएं

