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अररिया में बच्चों के अधिकार, सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रमाण सभागार, अररिया में हुई कार्यशाला की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने की। इसमें किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, बाल तस्करी की रोकथाम, बाल विवाह की रोकथाम, दत्तकग्रहण और बाल संरक्षण व्यवस्था से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। डीएम ने कहा- बच्चे देश का भविष्य कार्यशाला का उद्घाटन जिला पदाधिकारी विनोद दूहन, सचिव जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी, सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई और पुलिस उपाधीक्षक ने संयुक्त रूप से किया। डीएम ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। उनकी सुरक्षा, संरक्षण और अधिकारों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में अधिकारियों और संबंधित कर्मियों को संवेदनशीलता के साथ तेजी से कार्रवाई करने का निर्देश दिया। पुलिस के साथ सभी विभागों की अहम भूमिका जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव ने कहा कि बच्चों के संरक्षण की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस अधिकारियों तक सीमित नहीं है। इसमें समाज के साथ-साथ विभिन्न विभागों और संबंधित संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बाल अधिकारों और उनसे जुड़े कानूनी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। किशोर न्याय कानून और प्रक्रिया की दी जानकारी किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी ने कानून से जुड़े बच्चों के मामलों में लागू नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया से अवगत कराया। बच्चों की देखभाल और संरक्षण पर प्रशिक्षण रिसोर्स पर्सन भगवान जी पाठक ने देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बच्चों की जरूरतों को समझते हुए संरक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने से जुड़े बिंदुओं पर जानकारी साझा की। कार्यशाला में बाल तस्करी और बाल विवाह की रोकथाम को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर चर्चा हुई। साथ ही ऐसे मामलों की पहचान, रोकथाम और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को लेकर जानकारी दी गई। पॉक्सो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाले पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को मामलों में संवेदनशीलता के साथ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की जरूरत बताई गई। दत्तकग्रहण की प्रक्रिया समझाई कार्यशाला में बच्चों के दत्तकग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही जिले की बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रशिक्षण में जिले के सभी थानाध्यक्ष, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, श्रम एवं स्वास्थ्य विभाग, महिला हेल्पलाइन, किशोर न्याय परिषद, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मी शामिल हुए। बाल संरक्षण तंत्र मजबूत करने पर जोर कार्यशाला के दौरान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य, किशोर न्याय परिषद के सदस्य, बाल संरक्षण अधिकारी और जिला बाल संरक्षण इकाई के सभी कर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
DM बोले-'बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही नहीं, त्वरित कार्रवाई हो':पॉक्सो, बाल तस्करी और बाल विवाह की रोकथाम को दिया प्रशिक्षण

