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सीवान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने को लेकर सरकारी स्तर पर जारी निर्देश और फिर उसे वापस लेने के बाद सीवान में प्रशासनिक तैयारियों और सरकारी खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही आदेश वापस ले लिया गया। इसके बाद स्कूलों और प्रखंडों को कार्यक्रम नहीं करने का नया निर्देश जारी किया गया। स्कूलों से मंदिरों तक की गई थी तैयारी प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भाजपा की ओर से जिले में हवन, मरीजों के बीच फल वितरण, रक्तदान और जेपी चौक पर दीप प्रज्वलन समेत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी बीच सरकारी स्तर पर भी ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की तैयारी की गई थी। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में दीप जलाने के निर्देश दिए गए थे। वहीं जिला प्रशासन ने प्रखंड कार्यालयों के साथ प्रमुख मंदिरों और अन्य स्थलों पर अधिकारियों-कर्मचारियों के माध्यम से दीप प्रज्वलन की तैयारी कराई थी। राज्य के दूसरे जिलों में भी सरकारी परिसरों और शिक्षण संस्थानों में इस तरह के कार्यक्रम की तैयारियां किए जाने की जानकारी सामने आई थी। राजेंद्र पार्क में सजावट, कुर्सियां और कारपेट तक बिछे सीवान मुख्यालय में गोपालगंज मोड़ स्थित राजेंद्र पार्क को कार्यक्रम के लिए तैयार किया गया। यहां लाइटिंग और बैलून डेकोरेशन के साथ कुर्सियां और कारपेट तक बिछा दिए गए। महाराजगंज के मौनिया बाबा मंदिर, गुठनी के सोहगरा मंदिर और सिसवन के महेंद्रनाथ मंदिर समेत अन्य स्थानों पर भी प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की गईं। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही सरकारी स्तर पर जारी आदेश वापस ले लिया गया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों और जिला प्रशासन ने प्रखंडों को नया निर्देश जारी कर कार्यक्रम नहीं करने को कहा। अब खर्च की राशि और जिम्मेदारी पर सवाल कार्यक्रम रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल उन तैयारियों पर हुए खर्च को लेकर है, जो आदेश जारी होने के बाद की गई थीं। खासकर राजेंद्र पार्क में सरकारी स्तर पर कराई गई सजावट, कुर्सियों, कारपेट और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च की गई राशि को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि कार्यक्रम की तैयारियों पर कितनी राशि खर्च हुई, किस मद से भुगतान किया गया और आदेश वापस होने के बाद इस खर्च की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी। आदेश जारी होने और वापस लेने के बीच उठे सवाल सरकारी धन से होने वाले किसी भी आयोजन में खर्च और निर्णय की जवाबदेही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कार्यक्रम की तैयारियों के बाद आदेश वापस लिए जाने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टीकरण की मांग उठ रही है। यदि सरकारी स्तर पर कार्यक्रम का निर्देश जारी किया गया था और उसी के आधार पर तैयारियों पर खर्च हुआ, तो यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि सीवान में कुल कितना सरकारी धन खर्च हुआ और उस खर्च का भुगतान किस विभाग या मद से किया गया। कुछ ही घंटों के अंतराल में आदेश जारी होने और फिर वापस लिए जाने से प्रशासनिक स्तर पर समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
सीवान में ‘आशीर्वाद का दीया’ रद्द:तैयारियों पर खर्च को लेकर उठे सवाल; राजेंद्र पार्क में सजावट के बाद भी नहीं जले दीप
