Monday, September 21, 2026

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चतरा पहुंचा TSPC प्रमुख ब्रजेश गंझू का शव:पूर्व विधायक भाई बोला- मुठभेड़ नहीं, साजिश के तहत हत्या, CBI से हो पूरी जांच


यूपी एटीएस के साथ वाराणसी में हुई कथित मुठभेड़ में मारे गए टीएसपीसी कमांडर ब्रजेश गंझू का शव पैतृक गांव लावालौंग पहुंचते ही परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मृतक के भाई और सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू, पत्नी उषा देवी और बेटे ऋषिकेश ने पुलिस के मुठभेड़ के दावे को खारिज करते हुए इसे हत्या बताया है। गणेश गंझू ने आरोप लगाया कि ब्रजेश को पुलिस यहां से पकड़कर वाराणसी ले गई और वहां उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की सीबीआई और मानवाधिकार आयोग से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर, यूपी एटीएस का कहना है कि रामनगर क्षेत्र में संदिग्धों को रोकने पर गोलीबारी हुई और जवाबी कार्रवाई में ब्रजेश घायल हुआ, जिसे अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। एटीएस के मुताबिक मौके से हथियार, कारतूस और नकदी भी बरामद हुई थी। पूर्व विधायक भाई बोले- मुठभेड़ नहीं, साजिश के तहत हत्या गणेश गंझू ने कहा कि यह कोई मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि ब्रजेश को पकड़कर सुनियोजित तरीके से मार दिया गया। उन्होंने सरकार से पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि केवल इनाम घोषित करने से नक्सल समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को यह भी विचार करना चाहिए कि आखिर लोग नक्सली गतिविधियों की ओर क्यों जाते हैं। गणेश गंझू के अनुसार, ब्रजेश वर्ष 2010 में पंचायत का मुखिया रहा और बाद में पंचायत समिति सदस्य भी बना। परिजनों का कहना है कि यदि वह लगातार नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था, तो वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधि कैसे बना, इसकी भी जांच होनी चाहिए। ब्रजेश को लेकर सार्वजनिक रिकॉर्ड और पुलिस एजेंसियों का पक्ष हालांकि इससे अलग है। वह टीएसपीसी का शीर्ष कमांडर और लंबे समय से वांछित था। उस पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और एनआईए की ओर से पांच लाख रुपए का इनाम घोषित था। पत्नी बोली- 10 साल से सामान्य जिंदगी जी रहे थे ब्रजेश गंझू की पत्नी उषा देवी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मामले की निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है। उन्होंने दावा किया कि उनके पति पिछले करीब दस वर्षों से घर से बाहर रहकर सामान्य जीवन जी रहे थे। नक्सली गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं था। उषा देवी ने सवाल उठाया कि अगर उनके पति नक्सली थे, तो उन्हें चुनाव लड़ने का प्रमाणपत्र कैसे मिला और वह जनप्रतिनिधि कैसे बने? उन्होंने दावा किया कि ब्रजेश ने गांव में स्कूल-कॉलेज खुलवाने में भूमिका निभायी और करीब 500 से 1000 गरीब बेटियों के विवाह में मदद की थी। पत्नी के अनुसार, पति की मौत की जानकारी भी परिवार को सीधे प्रशासन से नहीं, बल्कि मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो परिवार हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ेगा। परिजनों ने घटनाक्रम से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। बेटे ने अधिकारियों पर लगाया गंभीर आरोप मृतक के बेटे ऋषिकेश ने भी पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर पदोन्नति हासिल करने की लालच में की गई हत्या है। बेटे ने आशंका जतायी कि संभव है कि उनके पिता ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया हो और इसके बाद उन्हें कथित फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। परिवार चाहता है कि वाराणसी में हुई कार्रवाई के घटनाक्रम, ब्रजेश की गिरफ्तारी या मुठभेड़ से पहले की गतिविधियों, मौके के साक्ष्यों और पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच हो, ताकि मौत की परिस्थितियों को लेकर सामने आ रहे आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सके।

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