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आज वर्ल्ड अल्जाइमर्स डे पर चर्चा डिमेंशिया यानि भूलने की बीमारी की। उम्र बढ़ने पर कभी-कभार चाबी, चश्मा या मोबाइल रखने की जगह भूलना सामान्य है। लेकिन बार-बार एक ही सवाल पूछना, हाल की घटनाएं भूलना, परिचित लोगों को पहचानने में परेशानी या रोजमर्रा के काम प्रभावित होना डिमेंशिया का संकेत हो सकता है। एलएएसआई-डीएडी के अनुसार झारखंड में 60+ लोगों में डिमेंशिया की अनुमानित दर 7.17% है। 2016 में करीब 1.94 लाख, 2025 में ढाई लाख और 2036 तक करीब 3.98 लाख होने का अनुमान है। यह वास्तविक मरीजों की सरकारी गिनती नहीं, बल्कि अध्ययन आधारित अनुमान है। चाबी और चश्मा: अरे! चश्मा सिर पर था…उम्र हो गई है। यह समान्य है : सामान रखकर भूल जाना और थोड़ी देर में याद आ जाना, उम्र बढ़ने का समान्य असर है।
खतरे की घंटी : अगर कोई यह भूल जाए कि चश्मा या ताला किस काम आता है, तो यह अल्जाइमर का संकेत हो सकता है। रास्ता और तारीख: आज मंगलवार या बुधवार? हरमू जाने वाला रास्ता कौन सा है? यह सामान्य है : सप्ताह का वार या कोई खास तारीख भूलना और कैलेंडर देखकर याद आना।
खतरे की घंटी : अपने ही जाने-पहचाने मोहल्ले या घर लौटने का रास्ता भूल जाना। बातचीत-शब्द: मुझे वो चाहिए! अरे, जिससे लिखते हैं। नाम जुबान पर नहीं आ रहा। यह सामान्य है : कभी-कभार व्यक्ति या वस्तु का नाम तुरंत याद न आना।
खतरे की घंटी : साधारण बातचीत के बीच में एकदम चुप हो जाना, वाक्य भूल जाना या गलत शब्दों का बार-बार इस्तेमाल करना। जांच का यह भी तरीका एक सफेद कागज पर गोल घेरा बनाएं और उसमें 1 से 12 तक के अंक सही जगह लिखें।
उसमें सुइयां बनाकर ‘11 बजकर 10 मिनट’ का समय दिखाएं। रिजल्ट : यदि अंक उल्टे-सीधे हों, क्रम बिगड़े या सुई की दिशा तय न हो पाए, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या साइकियाट्रिस्ट से संपर्क करें। भास्कर एक्सपर्ट डॉ. पवन कु. बर्णवाल, न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट और बिहेवियर साइंस स्पेशलिस्ट। सामान्य भूलना और डिमेंशिया में अंतर?
वर्ल्ड अल्जाइमर्स डे पर विशेष:भूलने की आदत कहीं अल्जाइमर तो नहीं? झारखंड में 60+ के 7 प्रतिशत लोगों को डिमेंशिया
