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जन्म से एक किडनी वाले नवकुमार 3 साल तक बिस्तर पर रहे, अब बांकुड़ा से पुरी की पदयात्रा पर निकले

वृंदावन के प्रसिद्ध संत बाबा प्रेमानंद की दोनों किडनी फेल है. फिर भी वह दो दशक से सत्संग और प्रवचन कर रहे हैं. इसे वह राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा मानते हैं. पश्चिम बंगाल के एक शख्स के जन्म से एक ही किडनी है. तीन साल तक बिस्तर पर बिताने के बाद अपने पैरों पर खड़े हो पाये. चल-फिर पा रहे हैं. इसे ईश्वर की कृपा मानकर उन्होंने अपना जीवन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया है.

आस्था के दम पर बांकुड़ा से पुरी की यात्रा पर निकले

कभी बीमारी ने कदम रोक दिये थे. करीब 3 साल तक बिस्तर पर रहना पड़ा. आज यही आस्था की राह पर लगातार आगे बढ़ रहा है. नाम है नवकुमार मल्लिक. पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के इंदास निवासी नवकुमार मल्लिक को इलाके में राधाचरण के नाम से भी जाना जाता है. नवकुमार भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए बांकुड़ा से पैदल पुरी की ओर निकल पड़े हैं.

बचपन से ही थी कई शारीरिक समस्याएं

एक किडनी के साथ जन्मे नवकुमार बचपन से ही शारीरिक समस्याओं से जूझते रहे. बीमारी के चलते उन्हें करीब 3 वर्षों तक बेड पर रहना पड़ा. उस दौरान सामान्य रूप से चलना-फिरना भी उनके लिए मुश्किल था.

हाथ में कमंडल और भगवान श्रीकृष्ण के साथ ओम का झंडा लेकर भी चल रहे नवकुमार मल्लिक.
हाथ में कमंडल और भगवान श्रीकृष्ण के साथ ओम का झंडा लेकर भी चल रहे नवकुमार मल्लिक.

6 दिन पैदल चलने के बाद पहुंचे दांतन

समय बदला और अब जब वह अपने पैरों से चल पा रहे हैं, तो इसे वह भगवान की कृपा मानते हैं. इसी विश्वास और कृतज्ञता के साथ नवकुमार ने बांकुड़ा के इंदास स्थित अपने घर से जगन्नाथ धाम पुरी तक पैदल यात्रा शुरू की है. 6 दिन पैदल चलने के बाद वह दांतन पहुंच चुके हैं. यहां से उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-16 का रास्ता पकड़ा है. इसी मार्ग से आगे पुरी की ओर बढ़ रहे हैं.

यात्रा में लोगों का ध्यान खींच रहे नवकुमार

भगवा वस्त्र, हाथ में भगवान जगन्नाथ की तस्वीर और जुबां पर हरिनाम अब यही नवकुमार की पहचान बन गयी है. रास्ते में उनका यह रूप लोगों का ध्यान खींच रहा है. लंबी दूरी, थकान और शारीरिक परेशानियों के बावजूद उनके कदम लगातार बढ़ रहे हैं.

नवद्वीप और वृंदावन की कर चुके हैं पैदल यात्रा

नवकुमार कहते हैं कि वह पहले भी पैदल नवद्वीप और वृंदावन की यात्रा कर चुके हैं. अब उनके मन में केवल एक ही संकल्प है- पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करना. नवकुमार मल्लिक ने कहा- बचपन से ही मेरी एक किडनी नहीं है. बीमारी के कारण लंबे समय तक बिस्तर पर पड़ा रहा. भगवान की असीम कृपा से आज अपने पैरों पर चल पा रहा हूं. उनकी ही कृपा से कभी नवद्वीप, तो कभी वृंदावन चला जाता हूं. अब पुरी के जगन्नाथदेव के दर्शन के लिए जा रहा हूं.

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