
नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रत्याशी हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे में उम्र संबंधी विवाद के चैप्टर को कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंद कर दिया है. हसीरानी रथ की उम्र और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी कथित विसंगति से संबंधित कांग्रेस की याचिका को कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दिया. जस्टिस कृष्णा राव ने यह फैसला सुनाया.
उम्र तक सीमित नहीं था विवाद
मामले में खास बात यह रही कि विवाद सिर्फ उम्र के तक सीमित नहीं था. कांग्रेस ने हलफनामे में दर्ज उम्र और दसवीं कक्षा की परीक्षा पास करने के वर्ष के बीच अंतर को आधार बनाया था. पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी का दावा था कि हलफनामे में रथ की उम्र 60 वर्ष से अधिक बतायी गयी है. उसी दस्तावेज में दसवीं कक्षा पास करने का वर्ष 1965 दर्ज है. पार्टी ने इन दोनों विवरणों के बीच गंभीर विसंगति का आरोप लगाते हुए दस्तावेजों के सत्यापन की मांग की थी.
हाईकोर्ट ने किस मांग पर नहीं दी राहत?
कांग्रेस की ओर से अधिवक्ता ऋजु घोषाल ने अदालत में दलील दी थी कि उम्मीदवार की ओर से जमा कराये गये दस्तावेजों की जांच करना निर्वाचन आयोग का दायित्व है. उन्होंने अदालत से 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशी द्वारा जमा दस्तावेजों की जांच कराने का आदेश देने का अनुरोध किया था.
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कांग्रेस को आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार नहीं : आयोग
निर्वाचन आयोग की ओर से इस याचिका के कानूनी अधिकार पर ही सवाल उठाया गया. आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल कांग्रेस इकाई को उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार नहीं है.
नामांकन जांच का चरण पूरा हो चुका है : आयोग
निर्वाचन आयोग के वकील जिष्णु चौधरी ने अदालत को बताया कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर को पूरी हो चुकी है. उनका तर्क था कि इस चरण के बाद आपत्ति दर्ज नहीं करायी जा सकती.
‘उम्र में अंतर नामांकन रद्द करने का आधार नहीं’
आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने यह भी दलील दी कि हलफनामे में कथित तौर पर गलत जानकारी दिया जाना अपने आप में नामांकन खारिज करने का आधार नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि उम्र में कथित अंतर को ऐसा गंभीर दोष नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर रथ की उम्मीदवारी रद्द की जाये, क्योंकि चुनाव लड़ने के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है.
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25 सितंबर को कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
जस्टिस कृष्णा राव ने दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद 25 सितंबर को कांग्रेस की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मंगलवार को अदालत ने याचिका खारिज कर दी. फैसले की विस्तृत प्रति बाद में हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध हो सकती है.
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