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करीब 734 करोड़ रुपए के जीएसटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रांची जोनल टीम ने बुधवार तड़के स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल के जमशेदपुर के कांट्रेक्टर्स एरिया स्थित आवास-कार्यालय समेत झारखंड व बंगाल के छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई झारखंड के जमशेदपुर (बिष्टुपुर, आदित्यपुर-गम्हरिया) और पश्चिम बंगाल के हावड़ा में एक साथ की गई। ईडी की इस संयुक्त कार्रवाई में 70 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। बिष्टुपुर के कांट्रेक्टर्स एरिया स्थित बबलू जायसवाल के आवास व मुख्य कार्यालय के अतिरिक्त बिष्टुपुर स्थित बीएस टावर में उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) संजय पारेख के ठिकाने और आदित्यपुर-गम्हरिया स्थित मेसर्स शारदा एंडेवर के संयंत्र व कार्यालय की भी घंटों तलाशी ली गई। ईडी की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत की गई है। कार्रवाई के समय बबलू जायसवाल अपने आवास पर ही मौजूद थे, जहां जांच अधिकारियों ने उनसे लंबी पूछताछ की। ईडी ने कंपनियों के बैंक खातों, वास्तविक खरीद-बिक्री के चालान, जीएसटी रिटर्न फाइल्स, वित्तीय लेनदेन और निवेश संबंधी तमाम कागजात जब्त किए हैं। इसके अतिरिक्त कम्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन से डिजिटल क्लोन तैयार कर अहम डेटा जुटाया है। प्रारंभिक जांच के बाद ईडी बबलू जायसवाल और उनके सीए संजय पारेख को औपचारिक समन भेजकर रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पूछताछ के लिए तलब करेगी।
हावड़ा में बेटे राज का नेटवर्क, रियल एस्टेट में खपाया धन
प. बंगाल के हावड़ा में भी ईडी ने छापेमारी की, जहां बबलू जायसवाल का कारोबार उनका बेटा राज जायसवाल संचालित करता है। राज जायसवाल मेसर्स केदारनाथ टेक्सिम समेत कई कंपनियों के निदेशक हैं। ईडी की जांच केवल जीएसटी चोरी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि फर्जी आईटीसी से बचाए गए राजस्व को कहां निवेश किया गया। जांच में सामने आया है कि कांट्रेक्टर्स एरिया और आसपास के प्रमुख इलाकों में जमीन की खरीद, बहुमंजिला आवासीय फ्लैटों के निर्माण और साझेदारी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर नकदी खपाई गई है।
5,000 करोड़ के फर्जी चालान जारी किए
डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस जमशेदपुर की शिकायत पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था। जांच के अनुसार, पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड जुगसलाई का अमित अग्रवाल उर्फ विक्की भालोटिया और कोलकाता का शिवकुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा तथा अमित गुप्ता रहे हैं। इस सिंडिकेट ने 135 कागजी (शेल) कंपनियां बनाकर करीब 5,000 करोड़ रुपए के फर्जी चालान जारी किए और वास्तविक माल आपूर्ति के बिना 734 करोड़ रुपए का आईटीसी हड़प लिया।
सीए संजय पारेख के ठिकाने पर दबिश, बैकडेटेड इंट्री व टैक्स दावों की पड़ताल ईडी की टीम ने बिष्टुपुर स्थित बीएस टावर में बबलू जायसवाल के वित्तीय सलाहकार और सीए संजय पारेख के दफ्तर को भी खंगाला। यहां से ऑडिट फाइल्स, जीएसटी फाइलिंग लॉग्स और बैलेंस शीट जब्त की गईं। जांच एजेंसी यह पड़ताल कर रही है कि बिना माल ढुलाई के जारी किए गए फर्जी चालानों को कानूनी रूप देने और आईटीसी का दावा करने में सीए स्तर पर क्या भूमिका निभाई गई।
बबलू जायसवाल से जुड़ी ये मुख्य फर्में जांच के दायरे में
{मेसर्स जय भोलानाथ {मेसर्स मां शारदा एंडेवर {मेसर्स मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड {मेसर्स केदारनाथ ट्रैक्सीन / टेक्सिम {मेसर्स ज्ञानदीप आयरन प्राइवेट लिमिटेड डमी डायरेक्टर के जरिए बबलू तक पहुंचा ईडी जांच एजेंसी ने 7 अगस्त 2025 को सरायकेला के कारोबारी पंचानंद सरदार के ठिकानों पर रेड की थी। जब्त दस्तावेजों के विश्लेषण में सामने आया कि पंचानंद सरदार को कागजों पर डमी डायरेक्टर बनाकर शेल कंपनी खड़ी की गई थी, जिसका नियंत्रण बबलू जायसवाल के पास था। इसी सुराग के बाद ईडी बबलू तक पहुंचा। पूर्व में बबलू से जुड़ी कंपनियों के जरिए करीब 55 करोड़ के संदिग्ध जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट का मामला उजागर हुआ था। अब जांच अधिकारियों ने इस नेटवर्क का सीधा लिंक 734 करोड़ रु. के मुख्य जीएसटी सिंडिकेट से जोड़ते हुए शिकंजा कसा है।
