
पश्चिम बंगाल में ओबीसी प्रमाण पत्र विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट ने वर्ष 2025-26 के दौरान जारी कुछ ओबीसी प्रमाण पत्रों को शुरू से ही अमान्य घोषित कर दिया था.
फैसले के अधीन होंगी संबंधित नियुक्तियां
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश देते हुए कहा है कि संबंधित भर्ती में होने वाली नियुक्तियां इस याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी. कोर्ट ने निर्देश दिया कि नवनियुक्त उम्मीदवारों को जारी होने वाले नियुक्ति पत्र में भी यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाये.
2024 के अभ्यर्थी ने दायर की है याचिका
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट शादान फरासत पेश हुए. याचिकाकर्ता वर्ष 2024 में पश्चिम बंगाल पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे. संबंधित मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने भी दलीलें रखीं, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए.
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जस्टिस बागची का भर्ती प्रक्रिया पर रोक से इनकार
सुनवाई के दौरान फरासत ने अंतरिम अवधि में रिक्त पदों को खाली रखने का अनुरोध किया. हालांकि, खंडपीठ ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. जस्टिस बागची ने कहा कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता.
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अन्य याचिकाओं के साथ होगी सुनवाई
इसके बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से आग्रह किया गया कि नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रखी जाएं. कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए नियुक्ति पत्रों में इसका उल्लेख करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने यह भी कहा कि सुनवाई इस मुद्दे से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ की जायेगी.
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