Thursday, October 8, 2026
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बिहारशरीफ मंडल कारा से कैदी की जगह बंदी को छोड़ा:पिता के एक जैसे नाम से हुई चूक, 7 दिन बाद खुला मामला; तीन वार्डन सस्पेंड


बिहार शरीफ मंडल कारा से एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक बंदी की जगह दूसरे विचाराधीन कैदी को रिहा कर दिया गया। इस बड़ी चूक के उजागर होने के बाद कारा प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जेल अधीक्षक की जांच रिपोर्ट के आधार पर कारा आईजी ने कड़ा संज्ञान लेते हुए तीन कर्मियों को निलंबित कर दिया है। हालांकि, पूरे मामले पर स्थानीय जेल प्रशासन ने आधिकारिक चुप्पी साध रखी है। कैदियों के पिता के मिलते-जुलते नाम की वजह से हुई चूक जानकारी के अनुसार, अस्थावां थाना कांड का आरोपित सतीश चौहान उर्फ सतीश बिंद और एक अन्य मामले का आरोपित चंद्रदीप चौहान उर्फ चंद्रदीप बिंद जेल में बंद थे। सतीश के पिता का नाम भी चंद्रदीप है। आरोप है कि कागजी प्रक्रिया के दौरान नाम के फेर में सतीश की जगह उसके पिता के हमनाम बंदी चंद्रदीप को 24 सितंबर को ही रिहा कर दिया गया। मामला तब गरमाया जब 1 अक्टूबर को सच सामने आया। इसके बाद आनन-फानन में वास्तविक रूप से जमानत पाए सतीश को जेल से छोड़ा गया, वहीं गलत पहचान से छूटे चंद्रदीप ने उसी दिन न्यायालय में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। दरअसल, अस्थावां थाना कांड संख्या 203/26 एवं 201/26 में बंद सतीश को रिहा किया जाना था। अस्थावां थाना कांड संख्या 362/25 में बंद चंद्रदीप को रिहा कर दिया गया। सहायक प्रवेश शाखा के कक्षपाल नवीश कुमार की रिपोर्ट के बाद एक अक्टूबर को गड़बड़ी पकड़ में आई। इसके बाद दो अक्टूबर की सुबह सतीश को विधिवत जेल से रिहा किया गया। वहीं, गलत तरीके से बाहर निकला चंद्रदीप उसी दिन दोपहर तीन बजे स्थानीय अदालत में सरेंडर कर दिया। दूसरे मामले में जमानत न मिलने की भी चर्चा घटना से जुड़ा एक अन्य पहलू भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि चंद्रदीप उर्फ बौना पर दो अलग-अलग मामले दर्ज थे, जिनमें से केवल एक में ही उसे जमानत मिली थी। दूसरे मामले में जमानत लंबित होने के बावजूद उसे रिहा कर दिया गया। रिहाई के आठ दिन बाद जब उसे अपनी लंबित जमानत का अहसास हुआ, तो उसने अदालत का रुख किया। इस पूरे मामले को लेकर एक कांग्रेस नेता ने वरीय अधिकारियों को आवेदन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई थी। जवाब-तलब के बाद गिरी निलंबन की गाज गड़बड़ी सामने आने के बाद जेल अधीक्षक ने संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा था। कर्मियों से मिले जवाब और प्राथमिक जांच के आधार पर जेल अधीक्षक ने मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजी। इसी रिपोर्ट के आधार पर कारा आईजी ने दोषी कर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। हालांकि कार्रवाई की जद में तीन कर्मी आए हैं या चार, इसे लेकर जेल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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