Wednesday, October 14, 2026
⚡

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

आज सिंदूर तृतीया: क्या कुंवारी लड़कियां मां दुर्गा को चढ़ा सकती हैं सिंदूर? जानें सही नियम और विधि

[

शारदीय नवरात्रि 2026, की तृतीया तिथि को ‘सिंदूर तृतीया’ और मां चंद्रघंटा की आराधना के दिन के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है. इस पावन अवसर पर देवी मां को सिंदूर अर्पित करने की पुरानी परंपरा है. आमतौर पर सिंदूर को अखंड सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक माना जाता है, इसलिए कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कुंवारी लड़कियां भी मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर सकती हैं?

शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार इसके स्पष्ट नियम बताए गए हैं.

क्या कुंवारी लड़कियां मां को सिंदूर चढ़ा सकती हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी कन्याएं मां दुर्गा को सिंदूर चढ़ा सकती हैं, लेकिन इसे अर्पित करने और प्रसाद रूप में लगाने के नियम सुहागिन महिलाओं से थोड़े अलग होते हैं:

भक्ति भाव से अर्पण: कुंवारी कन्याएं मां भगवती के चरणों में या उनकी प्रतिमा पर पूरी श्रद्धा के साथ सिंदूर अर्पित कर सकती हैं. शास्त्रों में देवी को सर्वमंगला कहा गया है, और उनकी पूजा का अधिकार सभी भक्तों को समान रूप से है.

मनोवांछित वर की प्राप्ति: ऐसी मान्यता है कि कन्याएं जब मां गौरी या मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर प्रार्थना करती हैं, तो उन्हें योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है तथा विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं.

लगाने का नियम: मांग में न लगाएं, माथे पर लगाएं तिलक

सिंदूर चढ़ाने के बाद उसे स्वयं पर लगाने के नियम को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:

मांग में सिंदूर भरना वर्जित: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, मांग में सिंदूर केवल विवाहित स्त्रियां ही भर सकती हैं. कुंवारी लड़कियों को कभी भी अपनी मांग में सिंदूर नहीं लगाना चाहिए.

माथे पर लगाएं तिलक: देवी को सिंदूर अर्पित करने के बाद, कन्याएं उसी सिंदूर को मां के आशीर्वाद या प्रसाद के रूप में अपने माथे पर तिलक (टीके) की तरह लगा सकती हैं. अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) से माथे पर सिंदूर का तिलक लगाना शुभ और तेज बढ़ाने वाला माना जाता है.

सिंदूर तृतीया पर पूजा की सही विधि

सिंदूर तृतीया के दिन मां दुर्गा और उनके तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा इस क्रम में करें:

स्नान और संकल्प: सुबह स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें.

कलश व प्रतिमा पूजन: चौकी पर स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और अक्षत, गंध व पुष्प अर्पित करें.

सिंदूर अर्पण: दाएं हाथ की अनामिका उंगली या किसी तांबे-चांदी के पात्र से मां के चरणों में चुटकी भर सिंदूर अर्पित करें. इस दौरान “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” या “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके” मंत्र का जप करें.

भोग और आरती: देवी को गुड़, खीर या ऋतुफल का भोग लगाएं और दुर्गा आरती करें.

प्रसाद ग्रहण: पूजा समाप्त होने के बाद सिंदूर को अनामिका उंगली से अपने माथे के मध्य भाग पर लगाएं और सुखी, समृद्ध जीवन की कामना करें.

साप्ताहिक राशिफल 12 से 17 अक्टूबर 2026: अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में किसकी चमकेगी किस्मत और किसे रहना होगा सतर्क? पढ़ें मेष से मीन का भविष्यफल

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles