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शादी नहीं हुई तो चुना अलग रास्ता,जानिए भोजपुरी सिंगर देवी के 10 साल लंबे संघर्ष और सिंगल मदर बनने की पूरी कहानी

Bhojpuri Singer Devi IVF Single Mother: भोजपुरी संगीत जगत की जानी-मानी पार्श्व गायिका देवी की सुरीली आवाज ने लाखों दिलों को जीता है. लेकिन पर्दे के पीछे उनकी निजी जिंदगी का संघर्ष किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. जब समाज महिलाओं के शादी और मां बनने को लेकर तयशुदा ढर्रे पर चलने का दबाव बनाता है, तब देवी ने अपनी जिंदगी का फैसला खुद लेने की हिम्मत दिखाई.

मनचाहा जीवनसाथी न मिलने पर मां बनने की तड़प और 10 साल के लंबे इंतजार के बीच अचानक जर्मनी से आए एक फोन कॉल ने उनकी पूरी दुनिया बदलकर रख दी. आईवीएफ तकनीक के जरिए सिंगल मदर बनने का उनका यह फैसला आज उन तमाम महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुका है, जो रूढ़िवादी सोच से बाहर निकलकर अपने सपनों को जीना चाहती हैं.

जर्मनी से आई एक कॉल और आईवीएफ का वो पहला कदम

जब इंसान अपनी जिंदगी के चौराहे पर खड़ा होता है, तो कभी-कभी एक सही सलाह पूरी दिशा बदल देती है. गायिका देवी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. अपने लिए मनमुताबिक जीवनसाथी न मिलने के बाद भी उनके भीतर मां बनने की तीव्र इच्छा थी. इसी कशमकश के बीच जर्मनी में रहने वाली उनकी एक करीबी सहेली का फोन आया.

उस सहेली ने उन्हें आईवीएफ तकनीक के जरिए सिंगल मदर बनने की राह दिखाई. देवी ने इस नए रास्ते को चुनने का साहसी फैसला लिया. वर्ष 2015 में उन्होंने आईवीएफ के माध्यम से मां बनने का पहला प्रयास किया, लेकिन उस समय उन्हें असफलता हाथ लगी.

10 सालों का लंबा इंतजार, नाकामी और बिना पछतावे का सफर

पहली कोशिश नाकाम होने के बावजूद देवी ने हार नहीं मानी. यह सफर बेहद मुश्किल और धैर्य की परीक्षा लेने वाला था. लगातार 10 वर्षों तक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर प्रयास करने के बाद आखिरकार उनका मां बनने का सपना साकार हुआ. आईवीएफ के जरिए उन्होंने एक नन्हे शिशु को जन्म दिया और सिंगल मदर बनीं.

अपने इस लंबे संघर्ष पर बात करते हुए देवी कहती हैं कि उन्हें जीवन में लिए गए किसी भी फैसले पर रत्ती भर भी पछतावा नहीं है. उनका मानना है कि इंसान अपनी गलतियों और अनुभवों से ही सीखता है तथा मजबूत बनकर आगे बढ़ता है.

प्रोफेसर माता-पिता का घर और 6 साल की उम्र से संगीत का सुरम्य सफर

देवी के व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ उनका संगीतमय सफर भी बेहद दिलचस्प रहा है. उनके माता-पिता दोनों पेशे से प्रोफेसर थे और संगीत के प्रति गहरा लगाव रखते थे. इसी वजह से बचपन से ही उनके घर में सुरों और भजनों का माहौल बना रहा. मात्र छह वर्ष की मासूम उम्र में देवी ने पहली बार मंच पर कदम रखा और अपनी गायकी की छाप छोड़ी. वर्ष 2003 में उनका पहला म्यूजिक एल्बम बाजार में आया, जिसने उन्हें भोजपुरी इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई.

23 वर्षों में बदल गया म्यूजिक का दौर, कैसे बदला कलाकारों का मंच

बीते 23 सालों में संगीत की दुनिया में आए बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए देवी ने अपने शुरुआती दिनों की यादें ताजा कीं. उन्होंने बताया कि 2000 के दशक में एक एल्बम निकालने के लिए कलाकारों को म्यूजिक कंपनियों के दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते थे.

संघर्ष का वह दौर बेहद कठिन था. लेकिन आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आने से पूरी दुनिया बदल चुकी है. अब नया कलाकार बिना किसी बिचौलिए या कंपनी के अपनी प्रतिभा को सीधे करोड़ों श्रोताओं तक पहुंचा सकता है. इसे वे संगीत उद्योग की सबसे बड़ी क्रांति मानती हैं.

पिता का अटूट साया, अनमोल मातृत्व और जमुई की वो हसीन यादें

अपनी इस पूरी जीवन यात्रा में देवी अपने पिता के योगदान को सबसे अहम मानती हैं. वे बताती हैं कि उनके पिता ने हर मुश्किल मोड़ पर उनका मार्गदर्शन किया और एक मजबूत ढाल बनकर खड़े रहे. मातृत्व के खूबसूरत अहसास पर भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे के साथ मां का रिश्ता पूरी तरह निस्वार्थ होता है, जिसमें किसी शर्त या अपेक्षा की जगह नहीं होती. मां बनने का सुख इतना अलौकिक है जिसे शब्दों में पिरोया नहीं जा सकता.

इस दौरान उन्होंने बिहार के जमुई जिले से अपने पुराने जुड़ाव का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 10 साल पहले वे यहां एक बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम में आई थीं. उस दौरान जमुई के लोगों से मिले अपार प्यार और उत्साह की यादें आज भी उनके दिल में पूरी तरह ताजा हैं.

Bhojpuri Singer Devi IVF Single Mother: समाज के लिए संदेश और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

गायिका देवी की यह कहानी केवल एक चर्चित हस्ती की आपबीती नहीं है, बल्कि यह बदलते भारतीय समाज में महिला स्वावलंबन और आत्मनिर्णय का एक सशक्त प्रतीक है. अपने मातृत्व के अधिकार के लिए 10 साल तक संघर्ष करना और बिना किसी पुरुष साथी के अकेले बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी उठाना, समाज की पुरानी सोच को खुली चुनौती देता है. उनका यह कदम उन तमाम महिलाओं को हौसला देता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने अस्तित्व और सपनों के लिए लड़ना चाहती हैं.

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