Friday, October 23, 2026
⚡

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

दीपक की जगह कौन बनेंगे CM के प्रधान सचिव:सम्राट की चलेगी या PMO की पसंद के आएंगे अधिकारी, रेस में कौन से 5 नाम


30 सितंबर 2026 को सीएम सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव दीपक कुमार को इस पद से हटाकर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद पूर्व आईएएस दीपक कुमार का बिहार सरकार से सीधा संपर्क टूट गया। वह 1 जून 2018 से मुख्य सचिव थे। सीएम के प्रधान सचिव के तौर पर आठ साल तीन महीने (99 महीने) सेवा दी। अब राजनीतिक गलियारों और ब्यूरोक्रेसी में चर्चा है कि दीपक कुमार की जगह किसे सीएम का प्रधान सचिव बनाया जाएगा। दैनिक भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए, इस पद की रेस में कौन से आईएएस अधिकारी हैं? सम्राट की पसंद चलेगी या RSS की पसंद को तवज्जो मिलेगी? क्या सीएम सम्राट अपनाएंगे नीतीश मॉडल? नीतीश कुमार ने बिहार में कामकाज का ऐसा मॉडल विकसित किया, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तर्ज पर मुख्यमंत्री के सलाहकार और प्रधान सचिव की अहम भूमिका रही। इस व्यवस्था के तहत उन्होंने पूर्व आईएएस अंजनी कुमार सिंह को प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी। उनके बाद पूर्व आईएएस दीपक कुमार इस पद पर रहे। अब सवाल है कि क्या सम्राट चौधरी भी नीतीश कुमार के इस मॉडल को आगे बढ़ाएंगे? इसे लेकर अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, सीएम सचिवालय के सूत्रों और सम्राट चौधरी के करीबियों के मुताबिक, सरकार के कामकाज में तेजी लाने और प्रशासनिक फैसलों को प्रभावी बनाने के लिए किसी पूर्व आईएएस अधिकारी को प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके लिए सम्राट चौधरी ने सही पूर्व आईएएस अफसर की तलाश शुरू कर दी है। सीएम के प्रधान सचिव की रेस में कौन से 5 IAS अफसर? 1. आईएएस संजय कुमार (1990 बैच): प्रधान सचिव की रेस में सबसे आगे बिहार कैडर के 1990 बैच के आईएएस अफसर संजय कुमार 30 जून 2026 को रिटायर हुए। केंद्र की मोदी सरकार में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव के रूप में उनका आखिरी कार्यभार रहा। अब सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव या मुख्य सलाहकार की भूमिका में उनकी नियुक्ति की चर्चा तेज है। दीपक कुमार को मुख्यमंत्री सचिवालय की जिम्मेदारी से हटाए जाने के बाद इन अटकलों को और बल मिल रहा है। सीएमओ का अनुभव, केंद्र सरकार में भी संभाली अहम जिम्मेदारी संजय कुमार को मुख्यमंत्री सचिवालय में काम करने का अनुभव है। जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक वे झारखंड में प्रतिनियुक्ति पर रहे और तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी संभाली। तीन साल बाद बिहार लौटने पर उन्हें स्वास्थ्य विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया। कोरोना काल के शुरुआती दौर में भी उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कमान संभाली। इसके बाद वह 2020 में वे शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव बने। फिर दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर चले गए। केंद्र में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव की जिम्मेदारी संभाली। सम्राट से बेहतर तालमेल, भाजपा आरएसएस नेतृत्व में भी पकड़ संजय कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद के अधिकारियों में गिना जाता रहा है। भाजपा नेताओं और आरएसएस के पदाधिकारियों के बीच भी उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है। प्रशासनिक अनुभव के साथ राजनीतिक नेतृत्व से बेहतर तालमेल उनकी दावेदारी को मजबूती देता है। नीतीश सरकार के दौरान संजय कुमार और सम्राट चौधरी के बीच अच्छे संबंध रहे। हाल में दोनों की मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री बनने पर संजय कुमार ने सम्राट को बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। ऐसे में मुख्यमंत्री सचिवालय में उन्हें नई जिम्मेदारी मिलने की चर्चा तेज है। 2. राजेश भूषण: कोरोना काल में मोदी सरकार का अहम चेहरा बिहार कैडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी राजेश भूषण मोदी सरकार के सबसे मजबूत अफसरों में से एक रहे हैं। बिहार से लेकर केंद्र सरकार तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। नरेंद्र मोदी की सरकार में कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रमुख प्रशासनिक चेहरा बने। संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता से लेकर टीकाकरण अभियान तक कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली। जुलाई 2020 में स्वास्थ्य मंत्रालय में सचिव की जिम्मेदारी संभालने के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय में सुरक्षा सचिव के पद पर रहे। 1. कैबिनेट सचिवालय में कार्यकाल: 2019 में कैबिनेट सचिवालय में सचिव (समन्वय) के पद पर तैनात थे। कैबिनेट सचिवालय में अपने ढाई साल के सेवाकाल के दौरान कैबिनेट (मुख्य मंत्रिमंडल), कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) और कैबिनेट आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) को प्रशासनिक व नीतिगत सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2. सुरक्षा सचिव के रूप में कार्यकाल: 1 नवंबर 2019 से 31 दिसंबर 2019 तक इस पद पर रहे। 31 अक्टूबर 2019 को तत्कालीन सुरक्षा सचिव एस.के. सिन्हा (IPS) के रिटायर होने के बाद केंद्र सरकार ने 1 नवंबर 2019 को राजेश भूषण को इस अत्यंत संवेदनशील पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। इस पद पर रहते हुए वे देश के सबसे वीवीआईपी सुरक्षा घेरे, यानी विशेष सुरक्षा समूह (SPG) के प्रशासनिक और सुरक्षा मामलों की देखरेख करने वाले प्रमुख अधिकारी थे। बिहार सरकार में भी संभाली अहम जिम्मेदारियां राजेश भूषण का प्रशासनिक अनुभव सिर्फ केंद्र सरकार तक सीमित नहीं है। उन्होंने बिहार में शिक्षा, परिवहन, सूचना और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में काम किया। तीन दशक से अधिक के सेवाकाल में राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर उनकी भूमिका रही। बाद में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव बने और इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। पत्नी रितु खंडूरी भाजपा की नेता, उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष राजेश भूषण का परिवार भाजपा और राजनीति से जुड़ा है। उनकी पत्नी रितु खंडूरी भूषण भाजपा नेता और उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष हैं। वह 26 मार्च 2022 को इस पद पर निर्विरोध चुनी गई थीं। इससे पहले 2017 में यमकेश्वर और 2022 में कोटद्वार विधानसभा सीट से विधायक चुनी गई थीं। रितु खंडूरी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सीनियर नेता बी.सी. खंडूरी की बेटी हैं। उनके पिता सेना में मेजर जनरल रहे और बाद में उत्तराखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3. सीके मिश्रा: केंद्र में अहम जिम्मेदारियां संभाली, PMO तक मजबूत पकड़ बिहार कैडर के 1983 बैच के आईएएस अधिकारी सीके मिश्रा केंद्र सरकार में हेल्थ, डिफेंस से लेकर पर्यावरण जैसे अहम मंत्रालयों में सेवा दे चुके हैं। करीब 37 साल की प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने दिल्ली और बिहार, दोनों जगह महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। 2012 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे सीके मिश्रा की केंद्र सरकार के काफी मजबूत पकड़ रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से भी उनके करीबी संबंध रहे हैं। सीके मिश्रा ने नीतीश सरकार में स्वास्थ्य, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी संभाली। केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने उद्योग और लघु उद्योग से जुड़े विभागों में काम किया। 2013 से 2017 तक केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सचिव के तौर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मिशन इंद्रधनुष जैसे प्रमुख कार्यक्रमों से जुड़े कामकाज संभाले। 13 अक्टूबर 2017 को उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव का पदभार संभाला। मई 2020 में इसी पद से रिटायर हुए। कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में मिश्रा की भूमिका अहम रही। वे कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से गठित अधिकार प्राप्त समूह के अध्यक्ष रहे। इस दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी समन्वय और महामारी प्रबंधन से जुड़े फैसलों में उनकी प्रशासनिक विशेषज्ञता का इस्तेमाल हुआ। मोदी सरकार में अहम भूमिका, भाजपा-आरएसएस से करीबी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में शीर्ष प्रशासनिक पदों पर काम करने के कारण सीके मिश्रा को केंद्रीय शासन-व्यवस्था और नीतिगत फैसलों का व्यापक अनुभव है। इनके पास मंत्रालयों के कामकाज के साथ केंद्र सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया की गहरी समझ है। बिहार भाजपा में भी उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है। उन्हें भाजपा और आरएसएस के करीबी के रूप में देखा जाता है। सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद भी सीके मिश्रा सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे एविडेंस एक्शन और रिजॉल्व टू सेव लाइव्स इंडिया जैसी संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। 4. अमरजीत सिन्हा: पीएम मोदी के भरोसेमंद अफसरों में गिनती बिहार कैडर के 1983 बैच के रिटायर आईएएस अमरजीत सिन्हा अपनी सख्त कार्यशैली और बेबाक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। केंद्र सरकार में काम के दौरान तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के साथ उनके टकराव की चर्चा रही। दोनों के बीच मतभेद इतने बढ़े कि मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को हस्तक्षेप करने की चर्चा थी। चर्चा थी कि इसके बाद सिन्हा को ग्रामीण विकास मंत्रालय भेजा गया। बाद में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सलाहकार भी बनाया गया। उन्हें पीएम मोदी के करीबी माने जाने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। प्रधानमंत्री के सलाहकार के रूप में किया है काम सिन्हा ने बिहार सरकार में भी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम विभागों में जिम्मेदारी निभाई। केंद्र में उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसे बड़े कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव रहते हुए मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े रहे। दिसंबर 2019 में ग्रामीण विकास सचिव पद से रिटायर होने के बाद फरवरी 2020 में उन्हें प्रधानमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया। जुलाई 2021 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 2022 से 2024 तक सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड के सदस्य रहे। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। लोक नीति और गरीबी उन्मूलन पर भी लेखन किया है। बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सिन्हा की पहचान अनुभवी और मजबूत संपर्क वाले अधिकारी की है। उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का करीबी भी माना जाता है। 5. त्रिपुरारी शरण, सीएम सम्राट से पुराना तालमेल, केंद्र में भी मजबूत पकड़ रिटायर आईएएस अधिकारी त्रिपुरारी शरण मई 2021 में मुख्य सचिव बने थे। उस समय तत्कालीन मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह के आकस्मिक निधन के बाद नीतीश सरकार ने त्रिपुरारी शरण को बिहार का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया था। त्रिपुरारी मुख्य सचिव थे तब सम्राट चौधरी पंचायती राज विभाग मंत्री थे। दोनों के बीच अच्छी पटती थी। सम्राट ने कई योजनाएं का काम इनके सहारे कराए। मई 2021 में त्रिपुरारी शरण बिहार के मुख्य सचिव बने थे। त्रिपुरारी जून 2021 में रिटायर होने वाले थे, लेकिन उन्हें दो बार 3-3 महीने के सेवा विस्तार का लाभ दिया गया। वे दिसंबर 2021 में रिटायर हुए। राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र की बीजेपी सरकार से उनकी नजदीकियां हैं। त्रिपुरारी मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में कार्यकाल 31 जुलाई 2026 को पूरा कर चुके हैं। उनके कार्यकाल पूरा होने के बाद बिहार के पूर्व डीजीपी विनय कुमार को नया मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण प्रतिनियुक्तियां केंद्र में जब एनडीए की सरकार रही तब त्रिपुरारी शरण को राष्ट्रीय स्तर के बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों की जिम्मेदारी मिली। वह प्रसार भारती के तहत दूरदर्शन का महानिदेशक और पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) का निदेशक बने। त्रिपुरारी मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के आगा नगर गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता एक शिक्षक थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुजफ्फरपुर में हुई। इसके बाद सैनिक स्कूल, तिलैया से पढ़ाई की। उन्होंने भौतिकी में स्नातक और समाजशास्त्र में पीजी की डिग्री हासिल की है। उनकी पत्नी सुजाता प्रसाद रिटायर आईएएस अधिकारी हैं। वह केंद्रीय संस्कृति सचिव के पद पर रही हैं। उनके बेटे विवान शरण एक जाने-माने अर्थशास्त्री और लेखक हैं जिन्होंने ‘Wonked!: India in Search of an Economic Ideology’ नामक पुस्तक लिखी है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles