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मुंगेर शादीपुर स्थित बड़ी दुर्गा महारानी की प्रतिमा का विसर्जन गुरुवार की देर शाम सोझी घाट पर नम आंखों से किया गया। इस बार प्रतिमा का विसर्जन निर्धारित समय से करीब 9 घंटे की देरी से हुआ। बुधवार शाम करीब 6 बजे मंदिर परिसर से निकली शोभायात्रा गुरुवार रात करीब 10 बजे गंगा घाट पहुंची, जहां कमेटी के सदस्यों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में प्रतिमा का विसर्जन किया गया। शोभायात्रा के दौरान बार-बार बांस टूटने और प्रतिमा को उठाने-रखने में परेशानी होने के कारण यात्रा की रफ्तार धीमी रही। बाद में प्रशासन ने अनुभवी कहारों और अन्य लोगों की मदद से शोभायात्रा को आगे बढ़ाया। बड़ी दुर्गा प्रतिमा को परंपरागत रूप से 32 कहारों के कंधों पर उठाकर विसर्जन के लिए ले जाया जाता है। 32 कहारों ने दिया कंधा इस बार प्रतिमा को कंधा देने के लिए 32 कहारों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु आगे आए, लेकिन कई लोगों को प्रतिमा उठाने, रखने और संतुलन बनाए रखने का पर्याप्त अनुभव नहीं था। इसके कारण बार-बार बांस टूटता रहा। कमेटी के सदस्य बांस को लगातार बांधकर प्रतिमा को आगे बढ़ाते रहे, लेकिन कुछ दूर चलने के बाद फिर वही समस्या सामने आ जाती थी। शोभायात्रा में हो रही देरी को देखते हुए बाटा चौक के पास प्रशासन ने अनुभवी कहारों के अलावा प्रतिमा उठाने और आगे बढ़ाने का अनुभव रखने वाले लोगों को लगाया। इसके बाद शोभायात्रा धीरे-धीरे आगे बढ़ी। बड़ी महावीर मंदिर में अंतिम आरती, पूजा-अर्चना और भोग लगाने के बाद प्रतिमा सोझी घाट पहुंची। मौके से आई तस्वारें…. इन रास्तों से गुजरी शोभायात्रा, जगह-जगह हुई आरती बुधवार शाम मंदिर से निकली प्रतिमा रात करीब 9 बजे सड़कों पर पहुंची। इसके बाद शोभायात्रा कोड़ा मैदान, अंबे चौक, कस्तूरबा वाटर, बड़ी बाजार, केनरा बैंक, पीएनबी चौक, बेकापुर बाजार पट्टी, मुख्य बाजार, बाटा चौक, एक नंबर ट्रैफिक, बड़ी महावीर मंदिर और भगत सिंह चौक होते हुए सोझी घाट पहुंची। रास्ते में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने मां की आरती उतारी और महाभोग लगाया।
प्रतिमा विसर्जन देखने के लिए बुधवार शाम से ही शहर की सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। गुरुवार देर शाम तक भी बड़ी संख्या में लोग शोभायात्रा के इंतजार में डटे रहे। अनुमान के मुताबिक, दो लाख से अधिक श्रद्धालु मां के दर्शन और विसर्जन के साक्षी बने। बड़ी दुर्गा के बाद बड़ी काली, छोटी दुर्गा और छोटी काली की प्रतिमाओं का भी सोझी घाट पर विसर्जन किया गया।
2020 की घटना के बाद बदली थी विसर्जन की व्यवस्था मुंगेर में वर्ष 2020 में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई हिंसक घटना के बाद शहर में तनाव फैल गया था। 26 अक्टूबर 2020 को विसर्जन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में कई लोग घायल हुए थे, जबकि एक युवक की मौत हो गई थी। इसके बाद आगजनी और हंगामे की घटनाएं हुई थीं।
अगले दिन 27 अक्टूबर की सुबह प्रशासन ने नगर निगम के ट्रैक्टर पर प्रतिमा लादकर विसर्जन कराया था। उस घटना के बाद प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरतता रहा है।
चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे जवान, ड्रोन से हुई निगरानी बड़ी दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन को लेकर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और शोभायात्रा मार्ग पर पुलिस जवानों और अधिकारियों की तैनाती की गई थी। भीड़ पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों के साथ वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और ड्रोन कैमरे की मदद ली गई। सुरक्षा के मद्देनजर शहर में वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रतिमा का विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
