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दरभंगा के जाले में आस्था, भक्ति और मां के प्रति अटूट श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ऐतिहासिक एवं पौराणिक सिद्धपीठ मां जलेश्वरी दुर्गा मंदिर की प्रतिमा विसर्जन यात्रा ने इस वर्ष पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। बुधवार दोपहर 3:30 बजे मंदिर परिसर से निकली विसर्जन यात्रा शुक्रवार शाम 7:10 बजे स्थानीय सुखाई पोखर पहुंची। जहां प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस तरह पूरी यात्रा में 47 घंटे 40 मिनट लगे। हजारों श्रद्धालुओं के जयकारों, भक्ति गीतों और झिझिया नृत्य के बीच मां की विदाई हुई। विसर्जन के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम थी। पूरा इलाका ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंजता रहा। प्रतिमा के साथ चल रहे चलंत मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाएं और युवतियां छह अलग-अलग टोलियों में बंटकर मां के समक्ष लगातार झिझिया नृत्य करती रहीं। जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए सेवा शिविर विसर्जन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह शरबत, पानी, लंगर और खाद्य सामग्री की व्यवस्था की गई थी। स्थानीय लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ यात्रा में शामिल भक्तों की सेवा की। भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस-प्रशासन की टीम लगातार यात्रा के साथ मौजूद रही। पिछले साल 42 घंटे में हुआ था विसर्जन पिछले साल मां जलेश्वरी की प्रतिमा का विसर्जन करीब 42 घंटे में हुआ था। उस समय प्रतिमा को लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी थी। इस बार दूरी महज आधा किलोमीटर रहने के बावजूद विसर्जन यात्रा 47 घंटे 40 मिनट तक चली। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में करीब पांच घंटे 40 मिनट अधिक समय लगा और पुराना रिकॉर्ड टूट गया। विसर्जन शांतिपूर्ण संपन्न होने पर पूजा समिति के अध्यक्ष रतन मेहता और सचिव देवनारायण मेहता उर्फ देवू ने मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने विसर्जन यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं, सहयोगियों और पुलिस-प्रशासन के प्रति आभार जताया। मां की विदाई के साथ ही श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर से मां के आगमन की कामना की और नम आंखों से विदा किया।
जाले में नम आंखों से माता दुर्गा की विदाई:मां जलेश्वरी की विसर्जन यात्रा में लगे 47 घंटे 40 मिनट, टूटा पिछले साल का रिकॉर्ड; हजारों भक्त हुए शामिल
