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बिहार विधानसभा के वर्तमान सत्र के दौरान बिहारशरीफ के विधायक डॉ. सुनील कुमार ने प्रजापति (कुम्हार) समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान का मुद्दा प्रमुखता से सदन के सामने रखा। उन्होंने राज्य में विलुप्त हो रही पारंपरिक माटीकला को संरक्षित करने के लिए सरकार से ‘माटीकला बोर्ड’ के गठन और कारीगरों को विशेष आर्थिक पैकेज देने की जोरदार वकालत की। सदन को संबोधित करते हुए डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि बिहार में प्रजापति समाज की एक बड़ी आबादी सदियों से मिट्टी के बर्तन और मूर्ति निर्माण जैसे काम के जरिए हमारी लोक परंपराओं को जीवित रखे हुए है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक की कमी, पूंजी का अभाव और उचित सरकारी प्रोत्साहन न मिलने के कारण आज यह पारंपरिक उद्योग संकट में है। इस समाज के कारीगर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी कला और आजीविका दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। विधायक ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां माटीकला बोर्ड के माध्यम से कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और बाजार की सुविधा प्रदान की जा रही है। उन्होंने बिहार सरकार से आग्रह किया कि यहां भी लाखों परिवारों के सर्वांगीण विकास के लिए जल्द से जल्द माटीकला बोर्ड का गठन किया जाए, ताकि इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से पुनर्जीवित किया जा सके। 25 प्रतिशत सब्सिडी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से विधायक डॉ. सुनील कुमार ने सरकार के सामने एक ठोस प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने मांग की कि प्रजापति समाज के युवाओं और कारीगरों को स्वरोजगार के लिए न्यूनतम ब्याज दर पर 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाए और इस राशि पर 25 प्रतिशत सब्सिडी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक मशीनों और संसाधनों की उपलब्धता से ही कारीगर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। डॉ. सुनील कुमार ने अंत में कहा कि सरकार की एक सकारात्मक पहल न केवल पारंपरिक माटीकला को नया जीवन देगी, बल्कि इससे ‘आत्मनिर्भर बिहार’ के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी।
बिहार विधानसभा में गूंजी प्रजापति समाज की आवाज:विधायक डॉ. सुनील ने की 'माटीकला बोर्ड' के गठन की मांग, कहा- विशेष आर्थिक पैकेज दें
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