गैस की कमी से मरीजों की थाली पर संकट! कोल्हान के अस्पतालों में कुछ ही दिनों का बचा स्टॉक

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गैस की कमी से मरीजों की थाली पर संकट! कोल्हान के अस्पतालों में कुछ ही दिनों का बचा स्टॉक

Jamshedpur Hospital LPG Crisis, जमशेदपुर (अशोक झा): जमशेदपुर में एलपीजी गैस की कमी का असर अब सरकारी अस्पतालों की रसोई तक पहुंच गया है. कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल और सदर अस्पताल परसुडीह में गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. स्थिति यह है कि सदर अस्पताल में शुक्रवार के बाद गैस का एक भी सिलेंडर उपलब्ध नहीं रहेगा, जबकि एमजीएम अस्पताल में भी केवल चार दिनों का ही स्टॉक बचा है. इससे अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गयी है.

सदर अस्पताल में गैस खत्म होने की कगार पर

खासमहल स्थित सदर अस्पताल की स्थिति सबसे अधिक गंभीर है. यहां प्रतिदिन करीब 120 से 130 मरीजों का भोजन तैयार किया जाता है, जिसके लिए रोजाना डेढ़ से दो गैस सिलेंडर की जरूरत होती है. गैस सप्लाई करने वाली एजेंसी ने फिलहाल आपूर्ति करने में असमर्थता जताई है. रसोई में मौजूद दो सिलेंडरों का गैस भी लगभग खत्म हो चुका है. ऐसे में अस्पताल प्रबंधन अब कोयले के चूल्हे पर भोजन तैयार करने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि लगभग 150 लोगों का खाना पारंपरिक चूल्हे पर बनाना बेहद मुश्किल होगा, जिससे भोजन की गुणवत्ता और समय दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

एमजीएम अस्पताल में 550 मरीजों के भोजन पर भी पड़ सकता है असर

कोल्हान का लाइफलाइन माना जाने वाला एमजीएम अस्पताल रोजाना करीब 535 से 550 मरीजों के लिए नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन तैयार करता है. यहां प्रतिदिन 8 से 9 गैस सिलेंडर की खपत होती है. गैस स्टॉक खत्म होने की आशंका को देखते हुए प्रबंधन अब मेन्यू में बदलाव करने पर विचार कर रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी डायबिटीज के मरीजों के लिए रोटी की व्यवस्था को लेकर हो सकती है. ऐसी स्थिति में रोटी के बजाय चावल देने की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि गैस की खपत कम की जा सके.

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स्थिति को लेकर हुई आपात बैठक

गुरुवार को एमजीएम अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. जुझार माझी ने डाइटिशियन अनु सिन्हा के साथ आपात बैठक की. उन्होंने गैस स्टॉक और भोजन व्यवस्था की पूरी रिपोर्ट मांगी. रिपोर्ट में बताया गया कि अस्पताल में फिलहाल करीब चार दिन का ही गैस स्टॉक शेष है. हालांकि सप्लाई एजेंसी ने मार्च के अंत तक आपूर्ति बनाये रखने का भरोसा दिया है, फिर भी प्रबंधन किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता है.

टाटा मोटर्स अस्पताल में स्थिति सामान्य

सरकारी अस्पताल के साथ साथ निजी हॉस्पिटल भी गैस संकट से जूझ रहे हैं. हालांकि टाटा मोटर्स अस्पताल में स्थिति सामान्य बनी हुई है. यहां भोजन तैयार करने के लिए आधुनिक विद्युत मशीनों का उपयोग किया जाता है, जिससे गैस संकट का कोई असर नहीं पड़ा है. इसके अलावा टाटा मोटर्स की 13 कैंटीनों में सोडेस्को एजेंसी के माध्यम से करीब 15 हजार कर्मचारियों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.

क्या कहते हैं जिम्मेदार पदाधिकारी

सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि गैस की कमी की सूचना मिली है. मरीजों के भोजन पर असर न पड़े, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है और विभाग जल्द समाधान निकालने में जुटा है.

वहीं, एमजीएम अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. जुझार माझी ने बताया कि फिलहाल अस्पताल में चार दिन का गैस स्टॉक मौजूद है. सप्लाई एजेंसी से लगातार संपर्क किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर मेन्यू में बदलाव सहित अन्य विकल्पों के जरिये मरीजों की भोजन व्यवस्था जारी रखी जायेगी.

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