फार्मेसी काउंसिल नियुक्ति पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने:विधानसभा में जांच की उठी मांग, नशे के बढ़ते मामले को कंट्रोल करने के लिए बनेगी टास्क फोर्स

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झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को झारखंड फार्मेसी काउंसिल में प्रभारी निबंधन सचिव की नियुक्ति का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। पूर्वी जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए इस मामले को सदन के सामने रखते हुए आरोप लगाया कि नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल में नियमों और निर्धारित योग्यता की अनदेखी कर यह नियुक्ति की गई थी। सरयू राय ने आरोप लगाया कि योग्य उम्मीदवारों की उपेक्षा कर चहेते लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जिससे विभागीय पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियुक्ति प्रक्रिया में किन अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही। नियमों के खिलाफ नियुक्ति हुई तो होगी कार्रवाई सरयू राय के आरोपों पर जवाब देते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस नियुक्ति के संबंध में शिकायतें मिली हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर जांच में यह पाया जाता है कि नियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई है, तो न केवल उस नियुक्ति को रद्द किया जाएगा बल्कि इसमें शामिल अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। मंत्री के इस आश्वासन के बाद सदन में कुछ समय के लिए माहौल शांत हुआ, लेकिन विपक्ष ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच पर जोर बनाए रखा। सरकारी हेलीकॉप्टर पर बहस, विपक्ष ने खरीद की मांग उठाई सदन में सरकारी हेलीकॉप्टर और चार्टर विमानों के उपयोग को लेकर भी जोरदार बहस हुई। विधायक शशि भूषण मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार निजी एजेंसियों से हेलीकॉप्टर और विमान किराये पर लेकर उनका इस्तेमाल कर रही है, जिससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि इन सेवाओं के लिए निजी एजेंसियों को अरबों रुपए का भुगतान किया जा चुका है। विधायक शशिभूषण मेहता ने सरकार से पूछा कि क्या भविष्य में अपना हेलीकॉप्टर खरीदने की कोई योजना है, जिससे खर्च कम किया जा सके और सरकारी नियंत्रण भी बना रहे। इस मुद्दे पर विपक्ष के कई सदस्यों ने भी समर्थन करते हुए कहा कि राज्य की जरूरतों को देखते हुए दीर्घकालिक योजना बननी चाहिए। सरकार ने कहा- तकनीकी वजह से खरीद मुश्किल बहस के दौरान विधायक शशि भूषण मेहता ने लातेहार क्षेत्र में हुए हेलीकॉप्टर हादसे का भी जिक्र किया, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि निजी कंपनी के हेलीकॉप्टर से जुड़ी इस दुर्घटना के बावजूद किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरकार का अपना हेलीकॉप्टर होता तो जवाबदेही स्पष्ट होती और मृतकों के परिजनों को बेहतर मुआवजा मिल सकता था। इस पर मंत्री दीपक बिरुआ ने जवाब देते हुए कहा कि नया हेलीकॉप्टर खरीदना फिलहाल व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि एक हेलीकॉप्टर की कीमत 80 से 100 करोड़ रुपए के बीच होती है, जबकि उसके रखरखाव, पायलटों की नियुक्ति और तकनीकी संचालन पर भी भारी खर्च आता है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे कई राज्य भी निजी एजेंसियों से ही ऐसी सेवाएं लेते हैं। ड्रग्स तस्करी नियंत्रण के लिए बनेगा विशेष टास्क फोर्स विधानसभा में राज्य में बढ़ते ड्रग्स कारोबार का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि हजारीबाग और रामगढ़ जिले ड्रग तस्करी के नए केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से रामगढ़ के पतरातू, बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि ब्राउन शुगर और हेरोइन जैसे नशे अब गली-मोहल्लों तक पहुंच चुके हैं। इससे युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। अपराध की घटनाओं में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2023 के बीच एनडीपीएस एक्ट के तहत 2396 मामले दर्ज हुए थे, जबकि पिछले तीन वर्षों में इन मामलों में और बढ़ोतरी हुई है। इस पर मंत्री योगेंद्र महतो ने सदन को भरोसा दिलाया कि ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और हर जिले में विशेष टास्क फोर्स गठित कर एंटी-नारकोटिक्स अभियान चलाया जाएगा।

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