
झारखंड हाई कोर्ट में बीबीए और एमबीए डिग्रीधारियों को साइंस ग्रेजुएट मानते हुए शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने मामले से प्रभावित सभी अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने और उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
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रांची/17.3.26: झारखंड हाईकोर्ट में हाई स्कूल संयुक्त प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक नियुक्ति-2021 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हुई। अदालत में उस याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें बीबीए और एमबीए डिग्रीधारियों को साइंस ग्रेजुएट मानते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई एस. एन. प्रसाद और ए. के. राय की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस मामले से प्रभावित होने वाले सभी अभ्यर्थियों को एक साथ प्रतिवादी बनाया जाए, ताकि अदालत में सभी पक्षों को सुनकर अंतिम निर्णय लिया जा सके।
प्रभावित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी करने का निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस मामले से प्रभावित अभ्यर्थियों को सूचना देने के लिए समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित किया जाए या फिर उन्हें सीधे नोटिस भेजा जाए। इसका उद्देश्य यह है कि सभी संबंधित अभ्यर्थियों को अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके।खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में जिन उम्मीदवारों के अधिकार या अवसर प्रभावित हो सकते हैं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में शामिल करना आवश्यक है। इससे अदालत को पूरे मामले की वास्तविक स्थिति समझने में भी सहायता मिलेगी।
शिक्षक नियुक्ति-2021 से जुड़ा है मामला
यह मामला हाई स्कूल संयुक्त प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक नियुक्ति-2021 से जुड़ा हुआ है। इस नियुक्ति प्रक्रिया का संचालन झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा किया गया था।इस प्रक्रिया के दौरान आयोग ने केवल साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स विषयों से स्नातक करने वाले अभ्यर्थियों को ही पात्र मानते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किया था। बीबीए और एमबीए डिग्रीधारियों को इन श्रेणियों में शामिल नहीं माना गया, जिसके कारण उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
वंचित अभ्यर्थियों ने दायर की थी याचिका
नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किए जाने के बाद बीबीए और एमबीए डिग्रीधारी अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनकी डिग्री भी प्रबंधन और व्यवसाय से संबंधित उच्च शिक्षा है और उन्हें पूरी तरह से अयोग्य मानना उचित नहीं है।मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश में बीबीए और एमबीए डिग्रीधारियों को साइंस ग्रेजुएट के समकक्ष मानते हुए राज्य सरकार और आयोग को निर्देश दिया था कि उन्हें भी नियुक्ति प्रक्रिया में विचार किया जाए।
राज्य सरकार ने आदेश को दी चुनौती
एकलपीठ के आदेश के बाद राज्य सरकार ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए खंडपीठ में अपील दाखिल की है। सरकार का कहना है कि यदि एकलपीठ के आदेश को लागू किया गया तो पहले से चल रही चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और भर्ती प्रक्रिया में जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।सरकार ने अदालत से यह भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया पहले से निर्धारित नियमों और पात्रता मानदंडों के आधार पर संचालित की जा रही थी।
ऐसे में बीच में पात्रता मानदंडों में बदलाव से कई प्रशासनिक और कानूनी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।फिलहाल अदालत ने सभी प्रभावित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके बाद सभी पक्षों की दलीलें सुनकर अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी।




