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आज से नहाय-खाय के साथ चैती छठ की शुरुआत हो गई है। भरणी नक्षत्र और वैधृति योग में चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो गया है। चैती छठ का व्रत पूर्वांचल व उत्तर भारत के अलावा पूरे देश में संयम व पवित्रता के साथ मनाया जाता है। चैती छठ का पर्व प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति आस्था का प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। अस्ताचल व उदयमान सूर्य को अर्घ्य की परंपरा इसी वैदिक भावना की अभिव्यक्ति है। नहाय-खाय में कद्दू भात का बनेगा प्रसाद पंडित झा राकेश झा ने बताया कि, ‘इस महापर्व की शुरुआत में व्रती आज पवित्र गंगा नदी, जलाशय या अपने घरों में गंगाजल मिलाकर स्नान के साथ शुरू होगा। व्रत के प्रसाद के लिए मंगवाये गये गेहूं को गंगाजल में धोकर सुखाया जायेगा। इस गेहूं में कोई पक्षी, कीड़ा का स्पर्श नहीं हो इसके लिए खुद और परिवारजन के साथ पारंपरिक लोकगीत गाते हुए इसकी रखवाली करेंगी। महापर्व के प्रसाद से दूर होते हैं कष्ट पंडित झा राकेश झा ने बताया कि, ‘छठ महापर्व के पहले दिन नहाय-खाय में लौकी की सब्जी, अरवा चावल, चने की दाल, आंवला की चासनी के सेवन का खास महत्व है। खरना के प्रसाद में ईख के कच्चे रस, गुड़ के सेवन से त्वचा रोग,आंख की पीड़ा समाप्त हो जाते है। वहीं, इसके प्रसाद से तेजस्विता, निरोगिता व बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है। वैदिक मान्यता है कि इस व्रत से पुत्र की प्राप्ति होती है। वहीं, वैज्ञानिक मान्यता है कि इससे गर्भाशय मजबूत होता है।
नहाय-खाय के साथ चैती छठ का महापर्व आज से शुरू:भरणी नक्षत्र और वैधृति योग का बन रहा संयोग, कद्दू भात का बनेगा प्रसाद
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