‘अभया’ की मां के BJP से लड़ने पर दिप्सिता धर निराश, कहा- न्याय की मेरी लड़ाई राजनीतिक लाभ के लिए नहीं

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‘अभया’ की मां के BJP से लड़ने पर दिप्सिता धर निराश, कहा- न्याय की मेरी लड़ाई राजनीतिक लाभ के लिए नहीं

Dipsita Dhar Interview: आरजी कर अस्पताल की जघन्य घटना को करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन इसकी गूंज आगामी विधानसभा चुनावों में साफ सुनाई दे रही है. दमदम उत्तर सीट से माकपा (CPIM) की युवा उम्मीदवार दिप्सिता धर ने पीड़िता की मां के भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. दिप्सिता ने कहा कि हालांकि उन्हें पीड़िता की मां के फैसले से निराशा हुई है, लेकिन ‘अभया’ के लिए न्याय की उनकी मांग और भावनात्मक जुड़ाव रत्ती भर भी कम नहीं होगा.

बंगाल की महिलाएं कोई वस्तु नहीं हैं- दीप्सिता

दमदम उत्तर से तृणमूल की कद्दावर मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को चुनौती दे रही 32 वर्षीय दिप्सिता धर ने स्पष्ट किया कि उनका चुनावी मुद्दा केवल एक सीट जीतना नहीं, बल्कि लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ राज्य की सभी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है. उन्होंने कहा- मेरे लिए यह चुनाव भावनात्मक है, क्योंकि मेरे पड़ोस में रहने वाली एक युवती के डॉक्टर बनने के सपने को बेरहमी से कुचल दिया गया. न्याय अब भी अधूरा है और असली अपराधी आजाद हैं.

वामपंथियों पर लगे आरोपों का खंडन

पीड़िता के माता-पिता द्वारा वामपंथियों पर ‘न्याय की मांग का राजनीतिकरण’ करने के आरोपों को दिप्सिता ने सिरे से खारिज किया. कहा- यह उनका अधिकार है कि वे किस पार्टी को चुनें, लेकिन माकपा ने पीड़िता के परिवार का साथ चुनावी लाभ के लिए नहीं दिया था. हमारा संघर्ष सड़कों पर न्याय के लिए था और आगे भी जारी रहेगा.

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भ्रष्टाचार और मतदाता सूची (SIR) पर घेरा

जेएनयू की शोधकर्ता रहीं दिप्सिता ने ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) विवाद ने जनता के असली मुद्दों जैसे बेरोजगारी, गिरती स्वास्थ्य व्यवस्था और शिक्षा के बदतर हालात को पीछे धकेल दिया है. उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा SIR के विरोध को महज एक ‘दिखावा’ करार दिया.

माकपा के सामने बड़ी चुनौती

दिप्सिता ने स्वीकार किया कि इस चुनाव में वामपंथियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन वोटों को वापस पाना है, जो पिछले चुनावों में भाजपा की झोली में चले गये थे. उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस बार लोग पहचान की राजनीति की बजाय अधिकारों की राजनीति को चुनेंगे.

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दीप्सिता और उनकी जंग

  • मुकाबला : दमदम उत्तर में माकपा की दिप्सिता धर बनाम टीएमसी की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य.
  • कोर मुद्दा : आरजी कर मेडिकल कॉलेज की पीड़िता ‘अभया’ के लिए न्याय और महिलाओं की सुरक्षा.
  • बड़ा दावा : दिप्सिता ने कहा कि जांच अब भी दिखावा है और मुख्य अपराधी पकड़े नहीं गये हैं.
  • रणनीति : भाजपा की ओर गये वामपंथी वोटों को वापस लाकर विधानसभा में पकड़ मजबूत करना.

मेरे लिए यह चुनाव इस मांग को बुलंद करने का जरिया है कि बंगाल की महिलाएं कोई ऐसी ‘वस्तु’ नहीं हैं, जिनका जब मन चाहे बलात्कार या हत्या कर दी जाये. न्याय की हमारी मुहिम किसी के दल बदलने से प्रभावित नहीं होगी.

दिप्सिता धर, माकपा उम्मीदवार

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