'जदयू भी परिवारवाद से अछूता नहीं'-प्रशांत किशोर:बोले- राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना कोई नई बात नहीं है, दल उनका है तो…

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जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर बुधवार को मुंगेर पहुंचे। उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नीतीश कुमार की वापसी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका दल भी परिवारवाद से अछूता नहीं है। प्रशांत किशोर बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। मुंगेर में उन्होंने भगत सिंह चौक के पास स्थित ‘होटल हरि इंटरनेशनल एंड बैंक्वेट हॉल’ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने जन सुराज के बिहार नवनिर्माण अभियान की रणनीति पर भी चर्चा की। चुनाव परिणाम के बाद की थी घोषणा प्रशांत किशोर ने बताया कि चुनाव परिणाम के बाद जन सुराज के नेताओं ने पश्चिम चंपारण स्थित गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का उपवास रखा था। उस समय यह घोषणा की गई थी कि बिहार में बनी नई सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अवधि के बाद जन सुराज के कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता के बीच अपनी बात रखेंगे। प्रशांत किशोर ने यह भी बताया कि बिहार नव निर्माण अभियान को अगले पांच वर्षों तक प्रभावी ढंग से चलाने के लिए वे हर जिले में जाकर संगठन को पुनर्गठित करने का काम कर रहे हैं। जो व्यक्ति दल बनाता है, वही मुखिया बनता है नीतीश कुमार के जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर प्रशांत किशोर ने कहा कि इसमें कोई नई बात नहीं है, क्योंकि दल उनका है तो अध्यक्ष भी वही रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जन सुराज पिछले तीन वर्षों से यही बात कह रहा है कि बिहार में जो व्यक्ति दल बनाता है, वही दल का मुखिया बनता है और उसी दिन यह भी घोषणा कर देता है कि उसके बाद उसका बेटा नेता बनेगा। प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि तीस-पैंतीस साल तक जेपी, लोहिया और समाजवाद की बात करने वाले नीतीश कुमार का दल भी अब इस परिवारवाद का अपवाद नहीं रहा है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि 202 विधायकों के समर्थन के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। कहा था नीतीश पांच साल तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे उन्होंने कहा कि जन सुराज ने चुनाव से पहले ही यह कहा था कि परिणाम कुछ भी हो, लेकिन नीतीश कुमार अगले पांच वर्षों तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। चुनाव के तीन महीने बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ रहा है। वे स्वेच्छा से हटें या किसी दबाव में, लेकिन उन्हें पद छोड़ना पड़ रहा है।

मौके पर प्रीतम सिंह, शाहब मल्लिक, डॉ. संतोष सिंह, भावेश कुमार, ललन यादव, राजीव नयन, हिमांशु कुंवर, अंजली कुमारी, राकेश गोप, दिनेश सिंह, अमितेश कुमार, किशोर कुमार मुन्ना, जेपी सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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