Friday, May 22, 2026

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राज्य के लगभग 80 प्रतिशत वकीलों की आर्थिक स्थिति कमजोर:आंदोलन की चेतावनी, केंद्र-राज्य सरकार पर वकीलों के प्रति उदासीन का आरोप


पटना में इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (बिहार चैप्टर) ने वकीलों की समस्याओं और न्यायपालिका की स्थिति पर चिंता जताई है। संगठन ने केंद्र-राज्य सरकार पर वकीलों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। शनिवार को अमरनाथ रोड स्थित केदार भवन में पीसी हुई। जिसमें संगठन के प्रदेश अध्यक्ष और पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। वर्मा ने बताया कि राज्य के लगभग 80 प्रतिशत वकीलों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उन्होंने चिंता जताई है कि वकील न्यायपालिका के प्रमुख स्तंभ होने के बावजूद उनके हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। बड़ी संख्या में युवा इस पेशे में आ रहे हैं, लेकिन शुरुआती दौर में आर्थिक अस्थिरता के कारण उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सरकार से ठोस सहायता न मिलने से यह समस्या और बढ़ जाती है। उन्होंने बिहार की न्यायपालिका को ‘संकट के दौर’ में बताया। वर्मा ने कहा कि अदालतों में जजों की भारी कमी के कारण लाखों मामले लंबित हैं, जिससे आम लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग की कि जिला अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। संगठन ने 7 प्रमुख मांगों को रखा…
पहली मांग: नव-पंजीकृत अधिवक्ताओं के लिए स्टाइपेंड योजना को लेकर थी। योगेश चंद्र वर्मा ने कहा कि बिहार सरकार की ओर से पहले ही घोषणा की जा चुकी है कि नए वकीलों को शुरुआती पांच वर्षों तक प्रति माह 5000 रुपए का स्टाइपेंड दिया जाएगा, लेकिन अब तक यह योजना धरातल पर लागू नहीं हो सकी है। उन्होंने इसे जल्द लागू करने की मांग की, ताकि युवा वकीलों को आर्थिक सहारा मिल सके।

दूसरी मांग: न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरने की रही। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में जजों की कमी के कारण मामलों का निष्पादन धीमा हो गया है, जिससे न्याय में देरी हो रही है। यह स्थिति न केवल वकीलों के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय है।

तीसरी मांग: अधिवक्ता कल्याण निधि को लेकर उठाई गई। संगठन ने कहा कि वर्तमान में मृत्यु और सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली राशि अपर्याप्त है। इसे बढ़ाकर कम से कम 25 लाख रुपए किया जाना चाहिए, ताकि वकीलों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

चौथी मांग: इसके अलावा अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना लागू करने की भी मांग की गई। उन्होंने ने कहा कि झारखंड की तर्ज पर बिहार में भी 60 वर्ष से अधिक आयु के वकीलों को न्यूनतम 14 हजार रु. मासिक पेंशन दी जानी चाहिए। इससे वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिलेगी।

पांचवीं मांग: स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी संगठन ने सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की। कहा कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को भी मिलना चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

छठी मांग: महिला अधिवक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायपालिका में 35 प्रतिशत आरक्षण की मांग की। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह कदम जरूरी है।

सातवीं मांग: इसके साथ ही सरकारी पैनल में वकीलों की नियुक्ति में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने कहा कि गरीब, दलित, आदिवासी, महिलाएं, पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के वकीलों को सरकारी पैनल में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

सरकार जल्द सकारात्मक पहल करे अंत में योगेश चंद्र वर्मा ने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की, तो वकील सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से होगा।
इस मौके पर इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (बिहार चैप्टर) के महासचिव राम जीवन प्रसाद सिंह और उदय प्रताप सिंह मौजूद रहे।

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