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राष्ट्रीय स्तर की एंड्योरेंस साइक्लिस्ट आशा मालवीय अपने राष्ट्रव्यापी साइक्लिंग अभियान के तहत रामगढ़ पहुंचीं, जहां स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने उनका जोरदार स्वागत किया। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की निवासी आशा महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 7,800 किलोमीटर की लंबी साइक्लिंग यात्रा पर निकली हैं। यह अभियान 78वें भारतीय सेना दिवस के उपलक्ष्य में 11 जनवरी को जयपुर से शुरू हुआ था। इस यात्रा का लक्ष्य देश के पश्चिमी छोर से पूर्वी सीमा अरुणाचल प्रदेश के कीबिथू तक पहुंचना है। अब तक आशा 5,200 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चुकी हैं। उनका यह सफर लगातार जारी है। पहले भी कर चुकी हैं कई कठिन यात्राएं आशा मालवीय का साइक्लिंग के क्षेत्र में योगदान बेहद प्रेरणादायक रहा है। इससे पहले भी उन्होंने महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के संदेश के साथ 26,000 किलोमीटर की अखिल भारतीय साइक्लिंग यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है। इसके अलावा उन्होंने कन्याकुमारी से कारगिल, सियाचिन और उमलिंगला (19,024 फीट) जैसे दुर्गम इलाकों को पार करते हुए दिल्ली और भोपाल तक की कठिन यात्रा भी पूरी की है। मध्य प्रदेश में भी उन्होंने लगभग 4,000 किलोमीटर की साइक्लिंग कर अपनी क्षमता का परिचय दिया है। राष्ट्रीय स्तर की साइक्लिस्ट होने के साथ-साथ आशा 100 और 200 मीटर दौड़ की एथलीट भी रह चुकी हैं। पर्वतारोहण में भी उन्होंने बी.सी. रॉय और तेनजिंग खान जैसे ऊंचे शिखरों पर सफल चढ़ाई कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की है। उनके इस उल्लेखनीय कार्य के लिए उनका नाम नेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। सीमित संसाधनों में हासिल की सफलता एक साधारण परिवार से आने वाली आशा मालवीय की सफलता की कहानी संघर्षों से भरी रही है। उनकी माताजी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद आशा ने अपने हौसले और मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अपनी कमाई से अपनी बहन की शादी भी कराई, जो उनके पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण को दर्शाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद देशभर में साइक्लिंग कर समाज को जागरूक करने का उनका प्रयास लाखों युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
